भारत के पहले बजट पर देश का हाल: जानकर हो जाएंगे हैरान, तिजोरी में सिर्फ इतना पैसा बचा था अंग्रेजों के जाने के बाद

1 फरवरी 2026 को आम बजट आने से पहले देश में हलचल तेज है. आजादी के बाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश हुआ था. इसे तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शणमुखम चेट्टी ने रखा. उस दौर में पूरा बजट सिर्फ 197.39 करोड़ रुपये का था. आज के नजरिए से देखें तो सचमुच हैरान करने वाली बात है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

देश का आम बजट 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश होने जा रहा है और एक बार फिर देशभर की निगाहें वित्त मंत्री के उस बही-खाते पर टिकी हैं, जिससे आम आदमी से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक की उम्मीदें जुड़ी होती हैं. टैक्स में राहत मिलेगी या महंगाई का बोझ बढ़ेगा. इन सवालों के बीच बजट को लेकर चर्चाएं तेज हैं.

इसी हलचल के बीच इतिहास के पन्नों में झांकना भी दिलचस्प है. आज जब भारत ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनने की बात करता है, तब यह जानकर हैरानी होती है कि आजाद भारत का पहला बजट कितना सीमित संसाधनों में तैयार किया गया था. उस दौर में देश की आर्थिक नींव किस तरह रखी गई, 

कैसे शुरू हुई भारत में बजट की परंपरा

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण कहा जाता है, जिसमें सरकार की आय और व्यय का पूरा ब्योरा होता है. हालांकि भारत में बजट पेश करने की परंपरा आजादी से काफी पहले शुरू हो चुकी थी. देश का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश शासन के दौरान पेश किया गया था, जिसे जेम्स विल्सन ने संसद के सामने रखा था.

आजादी के बाद पहला बजट

जिस क्षण का देश को इंतजार था, वह 1947 में आया. 15 अगस्त को स्वतंत्रता मिलने के बाद ठीक तीन महीने बाद, 26 नवंबर 1947 को आजाद भारत का पहला यूनियन बजट पेश किया गया. यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी तत्कालीन वित्त मंत्री सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने निभाई थी. यह बजट पूरे साल के लिए नहीं, बल्कि 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक यानी करीब साढ़े सात महीनों की अवधि के लिए बनाया गया था.

बंटवारे के दर्द के बीच तैयार हुआ पहला बही–खाता

देश उस समय विभाजन की पीड़ा, दंगों और विस्थापन की त्रासदी से गुजर रहा था. ऐसे माहौल में अर्थव्यवस्था को संभालना एक बड़ी चुनौती थी. सर आर.के. शनमुखम चेट्टी के सामने शरणार्थियों के पुनर्वास और सीमाओं की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे थे.

इस दौर की एक खास बात यह थी कि पाकिस्तान के अलग देश बनने के बावजूद सितंबर 1948 तक भारत और पाकिस्तान एक ही मुद्रा का इस्तेमाल कर रहे थे. बाद में सर चेट्टी के इस्तीफे के बाद जॉन मथाई ने वित्त मंत्री का पद संभाला और 1949-50 का बजट पेश किया, जो सभी रियासतों को मिलाकर बने संयुक्त भारत का पहला पूर्ण बजट था.

देश की कमाई

आज के आंकड़ों से तुलना करें तो उस समय के बजट की राशि चौंका देती है. आजाद भारत के पहले बजट में कुल राजस्व अनुमान महज 171.15 करोड़ रुपये था, जबकि सरकार का कुल खर्च करीब 197.29 करोड़ रुपये आंका गया था.

इस तरह पहला बजट घाटे का रहा और राजकोषीय घाटा लगभग 24.59 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. स्वतंत्रता के तुरंत बाद सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा होने के कारण रक्षा क्षेत्र पर बड़ा खर्च किया गया. बजट में सेना और रक्षा के लिए 92.74 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जो कुल खर्च का करीब आधा हिस्सा था.

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