कांग्रेस और शशि थरूर में ऑल इज नॉट वेल...सोनिया गांधी की बुलाई बैठक से बनाई दूरी, आखिर क्यों?

कांग्रेस और शशि थरूर के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. थरूर अक्सर बैठकों में अनुपस्थित रहते हैं और पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रुख अपनाते हैं. मंगलवार को वे लौटे, जिससे संवाद और सामंजस्य की संभावना बनी.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्ली: कांग्रेस और शशि थरूर के बीच के संबंधों पर चर्चा मंगलवार को फिर सामने आई, जब थरूर एक बार फिर पार्टी की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए. इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, पी. चिदंबरम, जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी और मनीष तिवारी जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. थरूर की गैरमौजूदगी ने एक बार फिर उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी को उजागर कर दिया.

बीते कुछ महीनों में यह पहला मौका नहीं है जब थरूर ने पार्टी की बैठक में हिस्सा नहीं लिया. इससे पहले 23 जनवरी को भी वे केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बुलाई गई बैठक में नहीं पहुंचे थे. थरूर के लगातार कुछ बैठकों से दूर रहने की प्रवृत्ति से उनके कांग्रेस नेतृत्व के प्रति मनमुटाव की अटकलें लगाई जा रही हैं.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अलग रुख

शशि थरूर अक्सर कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग नजर आते रहे हैं. हाल ही में उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के कोच और पूर्व बीजेपी सांसद गौतम गंभीर की खुलेआम प्रशंसा की. 21 जनवरी 2026 को उन्होंने गंभीर के लिए कहा कि वह प्रधानमंत्री के बाद भारत में सबसे मुश्किल काम करने वाला व्यक्ति हैं और आलोचनाओं के बावजूद शांत और निडर नेतृत्व करते हैं. कांग्रेस के अंदर इसे एक राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा गया.

पिछले साल दिसंबर में भी थरूर कांग्रेस की बैठक में काफी देर से पहुंचे थे. इसके अलावा कई मौकों पर वे बैठकों में अनुपस्थित रहे. विपक्ष की सरकार की तारीफ करना और पार्टी की बैठकों में शामिल न होना, यह संकेत माना जा रहा था कि थरूर पार्टी से नाराज हैं या कुछ मुद्दों पर असहमति रखते हैं.

पिछली बैठकों में लगातार अनुपस्थिति

शशि थरूर ने कांग्रेस की पिछली दो अहम बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था. संसद की शीतकालीन सत्र की रणनीति पर बुलाई गई बैठक में भी उनकी गैरमौजूदगी रही. 18 नवंबर को हुई पार्टी की एक और महत्वपूर्ण बैठक में भी थरूर शामिल नहीं हुए थे. इसके अलावा, संसद सत्र के दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी, जिसमें थरूर की अनुपस्थिति ने राजनीतिक सुर्खियां बनाई.

आज की बैठक में फिर लौटे

हालांकि, मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में शशि थरूर शामिल हुए. उनकी उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि पार्टी से दूरी के बावजूद वे संगठन के कामकाज में भाग लेने के लिए तैयार हैं. यह भी देखा जा रहा है कि थरूर की वापसी से कांग्रेस नेतृत्व और उनके बीच संवाद को फिर से पटरी पर लाने की संभावना बन सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि थरूर के रवैये में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मामलों पर उनके दृष्टिकोण का असर भी झलकता है. वे अक्सर पार्टी की सामूहिक नीति और व्यक्तिगत राय में संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं. उनकी बैठक में अनुपस्थिति और कभी-कभार वापसी दोनों ही राजनीतिक संदेश के तौर पर देखे जा सकते हैं.

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