ईरान जंग की आग में दुनिया जलती, भारत ने भविष्य की जंग के लिए एआई सेना की तैयार 

दुनिया में युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। ईरान जंग के बीच भारत ने भविष्य की लड़ाई के लिए नई एआई नीति बनाई है जिसमें किलर रोबोट, ड्रोन झुंड और साइबर युद्ध शामिल हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

दुनिया के युद्ध अब पुराने ढंग से नहीं लड़े जाते।पहले सैनिक मैदान में उतरते थे और टैंक आगे बढ़ते थे।लेकिन अब लड़ाई का चेहरा पूरी तरह बदल चुका है।अब युद्ध में तकनीक सबसे बड़ी ताकत बन गई है।मिसाइलें, ड्रोन और साइबर हमले जंग का नया हथियार हैं।ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग ने यह साफ कर दिया है।अब भविष्य की लड़ाई मशीनें और एल्गोरिद्म तय करेंगे।

क्या भारत ने नई तैयारी शुरू की?

भारत भी इस बदलती जंग को समझ चुका है।इसी वजह से भारतीय सशस्त्र सेनाओं के लिए नई एआई पॉलिसी बनाई गई है।इसका मकसद भविष्य की लड़ाई के लिए सेना को तैयार करना है।इस नीति में आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।सैन्य रणनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल किया जा रहा है।ताकि युद्ध के मैदान में तेजी और सटीकता बढ़ सके।और दुश्मन पर बढ़त बनाए रखना आसान हो।

क्या किलर रोबोट बनेंगे सैनिक?

नई नीति में घातक स्वायत्त हथियार प्रणाली यानी लीथल ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम शामिल हैं।इसका मतलब है ऐसे हथियार जो खुद फैसले ले सकें।इनमें किलर रोबोट और स्वचालित हथियार शामिल होंगे।जो बिना इंसान के सीधे युद्ध में उतर सकेंगे।सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों की जगह रोबोट भेजने की योजना है।ताकि सैनिकों का जोखिम कम हो सके।और मशीनें सीधे दुश्मन से भिड़ सकें।

क्या ड्रोन के झुंड बदलेंगे जंग?

भविष्य के युद्ध में ड्रोन की भूमिका बेहद अहम होगी।नई रणनीति में ड्रोन स्वार्म यानी ड्रोन के झुंड का इस्तेमाल शामिल है।यह दर्जनों ड्रोन एक साथ हमला कर सकते हैं।जो दुश्मन की रक्षा प्रणाली को भ्रमित कर देते हैं।करीबी युद्ध में यह सबसे खतरनाक हथियार बन सकते हैं।इनकी गति और संख्या दुश्मन को संभलने का मौका नहीं देती।यानी आसमान में छोटे ड्रोन भी युद्ध का रुख बदल सकते हैं।

क्या साइबर युद्ध भी होगा?

नई एआई नीति में साइबर युद्ध को भी अहम जगह दी गई है।भविष्य के युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं होंगे।कंप्यूटर नेटवर्क और डेटा भी युद्ध का मैदान बनेंगे।एआई आधारित साइबर हमले दुश्मन के सिस्टम को पंगु बना सकते हैं।मैलवेयर डिटेक्शन और साइबर डिफेंस पर जोर दिया जा रहा है।ताकि दुश्मन के डिजिटल हमलों को रोका जा सके।और अपनी सैन्य व्यवस्था सुरक्षित रखी जा सके।

क्या सेना की नजर और तेज होगी?

नई नीति में खुफिया और निगरानी क्षमता को भी मजबूत करने की योजना है।इसके तहत आधुनिक सेंसर और इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा।रडार, सोनार और इंफ्रा-रेड सिस्टम से जानकारी जुटाई जाएगी।सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरों का विश्लेषण किया जाएगा।एआई इन आंकड़ों को तेजी से समझ सकेगा।जिससे युद्ध के मैदान में तुरंत फैसला लेना आसान होगा।

क्या 2047 तक बदलेगी सेना?

यह पूरी रणनीति विजन 2047 के तहत तैयार की गई है।सरकार का लक्ष्य सेना को भविष्य की तकनीक से लैस करना है।इसके लिए एक डिफेंस क्लाउड बनाने की योजना है।जिसमें निजी कंपनियों और रिसर्च संस्थानों की मदद ली जाएगी।यानी सेना, उद्योग और शिक्षा जगत साथ काम करेंगे।ताकि भारत की सैन्य ताकत नई ऊंचाई तक पहुंच सके।और भविष्य की जंग में भारत पीछे न रहे।

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