'सोनिया गांधी मुझे CM बनाने वाली थी, पर राहुल ने…', हिमंता सरमा ने किया 2014 के घटनाक्रम का खुलासा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दावा किया कि 2014 में कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री बनाने वाली थी, लेकिन राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद हालात बदल गए. उन्होंने कहा कि बाद में भाजपा में शामिल होना उनके लिए बेहतर साबित हुआ.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने पुराने राजनीतिक सफर को लेकर बड़ा खुलासा किया. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 में कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें असम का मुख्यमंत्री बनाने का मन बना लिया था, लेकिन एक फोन कॉल के बाद पूरी तस्वीर बदल गई. यह बयान सामने आते ही सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं. कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में सरमा ने बताया कि 2011 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ गया था. 

सीएम सरमा ने बताया कि उस समय कई विधायक तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के नेतृत्व से संतुष्ट नहीं थे. सरमा का कहना है कि बहुमत उनके पक्ष में था और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनसे शपथ ग्रहण की तारीख तय करने तक को कहा था. उन्होंने यहां तक कहा कि उन्होंने कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेले के बाद शपथ लेने की योजना बनाई थी. हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उस समय विदेश में मौजूद राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद परिस्थितियां बदल गईं. सरमा ने बातचीत का विवरण नहीं दिया, लेकिन कहा कि उसी फोन कॉल के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया.

'58 विधायकों का समर्थन था'

सरमा ने यह भी कहा कि जब वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे असम आए थे, तब 58 विधायकों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई थी. कुछ विधायक तटस्थ थे, जबकि सीमित संख्या गोगोई के साथ थी. उन्होंने माना कि उस समय उन्हें निराशा हुई थी, लेकिन अब वे मानते हैं कि जो हुआ, वह उनके भविष्य के लिए बेहतर साबित हुआ. उनका कहना है कि अगर वे कांग्रेस में रहते, तो शायद उन्हें वह अवसर नहीं मिलता जो बाद में मिला. उन्होंने कहा कि भाजपा में आने के बाद उन्हें असम और अपनी विचारधारा की सेवा करने का मौका मिला.

कांग्रेस छोड़ने का लिया फैसला

सरमा ने 2014 में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और 2015 में कांग्रेस छोड़ दी. बाद में उन्होंने भाजपा में शामिल होकर राज्य में पार्टी को मजबूत किया और 2021 में मुख्यमंत्री बने. उन्होंने संकेत दिया कि उनके इस्तीफे के पीछे और भी कारण थे, जिनका खुलासा वे भविष्य में कर सकते हैं. उन्होंने कांग्रेस के कामकाज की आलोचना करते हुए कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले नेताओं के लिए वहां टिके रहना आसान नहीं है.

भाजपा में शामिल होंगे भूपेन बोराह!

इसी दौरान सरमा ने यह भी बताया कि पूर्व राज्य कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोराह जल्द ही भाजपा में शामिल होंगे. उनके अनुसार, यह कदम कांग्रेस के भीतर चल रही समस्याओं को उजागर करता है. उन्होंने बोराह को जमीनी नेता बताया और कहा कि उनका फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं पर बड़ा असर डालेगा. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक सौदा नहीं है और बोराह टिकट की शर्त पर पार्टी में नहीं आ रहे हैं.

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