'रूस पर नहीं, हम पर दबाव...', जेलेंस्की ने ट्रंप की रणनीति पर उठाए सवाल

वलोडिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप शांति वार्ता को लेकर यूक्रेन पर अनुचित दबाव बना रहे हैं. उन्होंने डोनबास क्षेत्र में किसी भी अतिरिक्त रियायत को जनमत में अस्वीकार्य बताया.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: यूक्रेन और रूस के बीच जारी लंबे युद्ध के बीच अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव साफ दिखाई दे रहा है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाया है कि वे शांति वार्ता के नाम पर यूक्रेन पर अनुचित दबाव बना रहे हैं. उनका कहना है कि बातचीत में संतुलन जरूरी है, लेकिन हाल की टिप्पणियां यूक्रेन से अधिक रियायतें मांगती दिख रही हैं.

अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा कि यह उचित नहीं है कि शांति योजना की शर्तों को लेकर सार्वजनिक रूप से केवल यूक्रेन से समझौते की उम्मीद की जाए, जबकि रूस पर वैसा दबाव नजर नहीं आता. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह ट्रंप की रणनीति हो सकती है, न कि कोई अंतिम फैसला. जेलेंस्की का कहना है कि वे शांति के प्रयासों की सराहना करते हैं, लेकिन किसी भी समाधान में यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं किया जा सकता.

डोनबास क्षेत्र पर जनमत संग्रह का मुद्दा

पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र को लेकर भी जेलेंस्की ने स्पष्ट रुख अपनाया. उनका कहना है कि यदि रूस द्वारा कब्जा न किए गए हिस्से को छोड़ने का प्रस्ताव जनमत संग्रह में रखा गया, तो यूक्रेन की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन का सवाल नहीं है, बल्कि वहां रहने वाले नागरिकों और देश की पहचान का मुद्दा है. ज़ेलेंस्की के मुताबिक लोग इसे भावनात्मक रूप से कभी स्वीकार नहीं करेंगे और न ही वे ऐसी किसी रियायत को माफ करेंगे.

ट्रंप ने दिया बयान 

हाल ही में ट्रंप ने बयान दिया था कि यूक्रेन को जल्द से जल्द बातचीत की मेज पर आना चाहिए. उन्होंने संकेत दिया कि वार्ता की सफलता के लिए कदम उठाना यूक्रेन की जिम्मेदारी है. हालांकि जेलेंस्की ने यह भी बताया कि अमेरिकी वार्ताकारों के साथ उनकी बातचीत सम्मानजनक रही है और सीधे तौर पर दबाव जैसा अनुभव नहीं हुआ. 

उनका कहना है कि वे ऐसे नेता नहीं हैं जो आसानी से दबाव में आ जाएं. जेलेंस्की ने सुझाव दिया कि अगर समझौते में मौजूदा संपर्क रेखा पर स्थिति को बनाए रखने की बात शामिल हो, तो संभव है कि यूक्रेनी जनता इसका समर्थन करे. उनका मानना है कि किसी भी स्थायी समाधान के लिए जनता की सहमति जरूरी है.

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