मध्य पूर्व में अमेरिका की बड़ी सैन्य तैनाती, 50 से अधिक लड़ाकू जेट भेजे

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने 50 से अधिक लड़ाकू जेट तैनात कर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब जिनेवा में ईरान के साथ परमाणु मुद्दे पर अप्रत्यक्ष वार्ता भी जारी है. वायु और नौसैनिक संपत्तियों की इस तेज तैनाती ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को और संवेदनशील बना दिया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को तेजी से मजबूत किया है. पिछले 24 घंटों में 50 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू जेट विमानों की तैनाती कर दी गई है, जबकि दूसरी ओर तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान के साथ नई राजनयिक वार्ताएं भी जारी हैं.

अमेरिकी अधिकारियों ने इस कदम को क्षेत्र में वायु और नौसैनिक क्षमताओं की बड़ी मजबूती बताया है. यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन एक साथ सैन्य और राजनयिक दोनों रणनीतियों पर आगे बढ़ रहा है.

50 से अधिक लड़ाकू जेट की तैनाती

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने मध्य पूर्व की ओर 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान रवाना किए हैं. स्वतंत्र उड़ान-ट्रैकिंग डेटा और सैन्य विमानन मॉनिटरों ने कई एफ-22, एफ-35 और एफ-16 लड़ाकू जेट विमानों को क्षेत्र की ओर बढ़ते हुए दर्ज किया.

इसके साथ ही कई हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों की आवाजाही भी देखी गई, जो इस बात का संकेत है कि इन जेट विमानों को लंबे समय तक संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है.

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, "पिछले 24 घंटों में 50 से अधिक लड़ाकू जेट विमानों को इस क्षेत्र में भेजा गया है," जिससे तैनाती के पैमाने और रफ्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है.

जिनेवा में परमाणु वार्ता जारी

यह सैन्य सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है जब अमेरिकी और ईरानी अधिकारी जिनेवा में अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता के दूसरे दौर में शामिल हैं.

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वार्ता में "प्रगति हुई है," हालांकि "अभी भी कई पहलुओं पर चर्चा बाकी है." एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप के दूतों जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के साथ बैठकों के बाद ईरानी प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर अधिक विस्तृत प्रस्तावों के साथ लौटेंगे ताकि "हमारे रुख में मौजूद कुछ अनसुलझे मुद्दों को सुलझाया जा सके."

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वार्ता को "गंभीर, रचनात्मक और सकारात्मक" बताया. उन्होंने कहा, "पिछली बैठक की तुलना में अच्छी प्रगति हुई है और अब हमारे सामने आगे का रास्ता स्पष्ट है."

उन्होंने आगे कहा, "अंततः, हम मार्गदर्शक सिद्धांतों के एक समूह पर आम सहमति तक पहुँचने में सफल रहे,” और चेतावनी देते हुए जोड़ा, “इसका मतलब यह नहीं है कि हम जल्दी ही किसी समझौते पर पहुँच जाएँगे, लेकिन कम से कम इस दिशा में काम शुरू हो गया है."

दूसरा विमानवाहक पोत समूह रवाना

इस बीच, अमेरिकी नौसेना के अनुसार यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप कैरेबियन सागर से निकलकर मध्य अटलांटिक में पहुंच चुका है और मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है.

अधिकारी ने बताया कि यह पोत तीन निर्देशित मिसाइल विध्वंसक जहाजों - USS महान, USS बैनब्रिज और USS विंस्टन चर्चिल - के साथ आगे बढ़ रहा है.

अपनी मौजूदा स्थिति को देखते हुए, यह पोत समूह ईरान के निकटवर्ती जलक्षेत्र तक पहुंचने में एक सप्ताह से अधिक समय ले सकता है.

इससे पहले यूएसएस अब्राहम लिंकन और अन्य महत्वपूर्ण अमेरिकी वायु एवं नौसैनिक संसाधनों को भी इस वर्ष की शुरुआत में क्षेत्र में तैनात किया जा चुका था, जिससे अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और मजबूत हुई है.

मध्यस्थ की भूमिका

ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी, जिन्होंने वार्ता में मध्यस्थता की, ने कहा कि बातचीत "सामान्य लक्ष्यों और संबंधित तकनीकी मुद्दों की पहचान करने की दिशा में अच्छी प्रगति के साथ समाप्त हुई."

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