जमात ने दी सड़क पर उतरने की धमकी...BNP के शपथ ग्रहण समारोह का किया बहिष्कार, लोगों से की उम्मीद न खोने की अपील
बांग्लादेश में बीएनपी सत्ता संभालते ही जमात-ए-इस्लामी और एनसीपी ने कैबिनेट शपथ समारोह का बहिष्कार कर दिया. वजह जुलाई चार्टर से जुड़े संविधान सुधार परिषद की शपथ से बीएनपी सांसदों का इनकार. जमात ने बीएनपी को फासीवादी बताते हुए सड़क आंदोलन की धमकी दी है.

नई दिल्ली : बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. 12 फरवरी के चुनाव में तारिक रहमान की बीएनपी ने 212 सीटें जीतकर सरकार बनाई, लेकिन सहयोगी जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी पहले दिन से ही आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. बीएनपी सांसदों ने संसद सदस्य की शपथ तो ली, लेकिन जुलाई चार्टर से जुड़े संविधान सुधार परिषद की शपथ लेने से मना कर दिया. इससे नाराज जमात और एनसीपी ने कैबिनेट शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया और सड़क पर विरोध की चेतावनी दे डाली.
दोहरी शपथ का विवाद
आपको बता दें कि बांग्लादेश में निर्वाचित सांसदों को दो अलग-अलग शपथ लेनी पड़ती हैं. एक सामान्य सांसद के रूप में और दूसरी जुलाई चार्टर के तहत संविधान सुधार परिषद के सदस्य के तौर पर. बीएनपी ने इस दूसरी शपथ से इनकार कर दिया. जमात नेता शफीकुल इस्लाम मसूद ने कहा कि पार्टी की संसदीय बैठक में यह फैसला लिया गया. बीएनपी के इस रवैये से जमात और एनसीपी बेहद नाराज हैं.
जुलाई चार्टर क्या है ?
जुलाई चार्टर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसे अंतरिम सरकार ने 17 अक्टूबर 2025 को अपनाया था. इसका उद्देश्य संसद को 180 दिनों के लिए संविधान सभा में बदलना है. इससे नई सरकार को संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव करने का अधिकार मिलता है. 12 फरवरी को हुए जनमत संग्रह में 62 प्रतिशत लोगों ने इसे समर्थन दिया था. बीएनपी ने हस्ताक्षर तो किए, लेकिन अब अंतिम संस्करण पर आपत्ति जता रही है.
चार्टर तैयार करते समय नहीं ली गई सलाह
बीएनपी का कहना है कि चार्टर तैयार करने में उससे सही सलाह नहीं ली गई. पार्टी ने अनिच्छा से हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अब दावा कर रही है कि अंतिम दस्तावेज में कई नई बातें जोड़ी गई हैं, जिन पर उसकी सहमति नहीं है. बीएनपी पहले सिर्फ चुनाव कराने के पक्ष में थी, जबकि जमात और एनसीपी सुधारों पर जोर दे रहे थे. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने दोनों काम एक साथ करा दिए.
बीएनपी को फासीवादी ताकत करार दिया
जमात महासचिव मिया गोलाम परवार ने बीएनपी को फासीवादी ताकत करार दिया. उन्होंने चुनाव में हेरफेर, चुनाव बाद हिंसा और नोआखाली में एनसीपी समर्थक महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया. जमात-एनसीपी गठबंधन ने साफ कहा कि वे सड़क पर उतरेंगे. एनसीपी के नासिरुद्दीन पटवारी ने तारिक रहमान को जवाबदेह बनाने की बात कही और लोगों से हिम्मत न हारने की अपील की.
राजनीतिक संकट की आशंका
यह घटना बांग्लादेश में नए संकट की शुरुआत लगती है. 2024 में शेख हसीना के खिलाफ जिस तरह आंदोलन हुए थे, उसी तरह अब जुलाई चार्टर और चुनावी अनियमितताओं को लेकर विरोध तेज हो सकता है. बीएनपी सरकार बनते ही सहयोगियों से टकराव शुरू हो गया है. अगर सड़क पर बड़े प्रदर्शन हुए तो राजनीतिक स्थिरता पर गहरा असर पड़ सकता है.


