शव को जलाने से प्रदूषण होता...चिराग पासवान के विधायक के बयान पर भड़के NDA के मंत्री दीपक प्रकाश

बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दौरान उस समय असहजता की स्थिति बन गई जब लोक जनशक्ति पार्टी(रामविलास) के गोविंदगंज से विधायक राजू तिवारी ने कहा कि शवों को लकड़ी से जलाने पर प्रदूषण होता है. जिसके बाद पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश उनके इस बात पर भड़क गए. उन्होंने कहा कि विधायक ने दाह संस्कार को प्रदूषण से जोड़ा है, जो ठीक नहीं है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

पटना : बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को एक बेहद दिलचस्प और गरमागरम वाकया पेश आया. चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) के विधायक राजू तिवारी ने जब ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत शवदाह गृहों के निर्माण की मांग उठाई, तो उनके तर्क देने के अंदाज ने अपनी ही सरकार के सहयोगियों को काफी असहज कर दिया. जब उन्होंने पारंपरिक दाह संस्कार को सीधे तौर पर प्रदूषण से जोड़ा, तो भाजपा और जदयू के मंत्री भड़क गए. सदन में विकास के साथ-साथ परंपरा पर बहस छिड़ गई.

राजू तिवारी के तर्क पर भड़के दीपक प्रकाश 

आपको बता दें कि गोविंदगंज के विधायक राजू तिवारी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए राज्य में विद्युत शवदाह गृहों की भारी कमी का मुद्दा प्रभावी ढंग से उठाया. उन्होंने तर्क दिया कि पारंपरिक तरीके से शव जलाने के लिए भारी मात्रा में लकड़ियों की आवश्यकता होती है. लकड़ियों की बढ़ती किल्लत, ऊँची लागत और वनों की कटाई को देखते हुए आधुनिक तकनीक अपनाना अब अनिवार्य हो गया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि लकड़ी से दाह संस्कार करने पर पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है और प्रदूषण भी काफी बढ़ रहा है.

सत्ता पक्ष की कड़ी आपत्ति

राजू तिवारी के 'प्रदूषण' वाले शब्दों ने सत्ता पक्ष के अन्य सदस्यों को तुरंत नाराज कर दिया. पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि दाह संस्कार जैसी पवित्र सामाजिक परंपरा को प्रदूषण के चश्मे से देखना अनुचित है. भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा और अन्य सदस्यों ने भी तिवारी को बीच में ही टोकते हुए उनके बयान पर गहरी नाराजगी जताई. गठबंधन के भीतर इस वैचारिक मतभेद के कारण सदन में कुछ देर के लिए काफी असहज स्थिति और गहमागहमी पैदा हो गई.

सरकार की शहरी विकास योजना

बहस के बीच उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्थिति को बखूबी संभाला. उन्होंने सदन को सूचित किया कि बिहार के सभी प्रमुख शहरों और महत्वपूर्ण नदी घाटों पर विद्युत शवदाह गृह और 'मोक्ष धाम' बनाने की योजना पर कार्य हो रहा है. वर्तमान में राज्य के 264 नगर निकायों में से 41 में यह योजना कार्यान्वित की जा रही है, जबकि 11 शहरों में ये केंद्र पहले से संचालित हैं. सरकार शेष 30 शहरों के लिए भी जल्द ही विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रही है.

इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए बड़े फंड की जरूरत 

विद्युत शवदाह गृहों के निर्माण के लिए धन की व्यवस्था पर भी सदन में विस्तार से चर्चा हुई. मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग पंचायतें इस कार्य के लिए अपने स्तर पर कर सकती हैं. हालांकि, राजू तिवारी ने इस पर असहमति जताते हुए कहा कि यह आवंटित राशि बहुत कम है और इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए विशेष फंड और विभाग की स्पष्ट गाइडलाइन की जरूरत है. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त बजटीय प्रावधान की मांग को सदन में पुरजोर ढंग से दोहराया.

ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तार की उम्मीद

अंततः सरकार ने विधायक राजू तिवारी की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया. डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और पंचायती राज मंत्री ने स्पष्ट किया कि जैसे शहरों में काम हो रहा है, वैसे ही अब ग्रामीण क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जाएगी. सरकार पूरे बिहार में ऐसे स्थानों को चिह्नित कर रही है जहां इन शवदाह गृहों की सबसे ज्यादा जरूरत है. इस आश्वासन के बाद ही सदन का माहौल शांत हुआ. सरकार अब गांवों में भी आधुनिक दाह संस्कार व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने पर विचार करेगी.

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