शहबाज-मुनीर की खुली पोल! पूर्व भारतीय राजदूत ने पाकिस्तान का 'मध्यस्थ' वाला झूठ किया एक्सपोज, पाक को बताया मैसेंजर
ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध में पकिस्तान पिसता हुआ दिखाई दे रहा है. इस तनाव में पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ बताकर काफी ढिंढोरा पीट रहा था. हालांकि अब सच्चाई सामने आ गई है.

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के समय पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ बताकर काफी ढिंढोरा पीट रहा था. प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर के नेतृत्व में इस्लामाबाद दावा कर रहा था कि वह दोनों पक्षों के बीच शांति की बातचीत करा रहा है, लेकिन अब यह दावा पूरी तरह बेनकाब हो गया है.
भारत के पूर्व राजदूत संजय सुधीर, जो संयुक्त अरब अमीरात में चार साल तक तैनात रहे, उन्होंने एएनआई को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान की कूटनीति की पोल खोल दी. उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान कभी भी सच्चा मध्यस्थ नहीं था. वह ज्यादा से ज्यादा एक संदेशवाहक (मैसेंजर) की भूमिका निभा रहा था.
मध्यस्थता और संदेशवाहक में बड़ा अंतर
सुधीर ने समझाया कि मध्यस्थता तब होती है जब दोनों पक्ष मध्यस्थ के सामने बैठकर बात करें, लेकिन ईरान-अमेरिका मामले में ऐसा कभी नहीं हुआ. पाकिस्तान सिर्फ संदेश पहुंचाने का काम कर रहा था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कल तक खुद को मध्यस्थ बताकर प्रचार कर रहा था, लेकिन असलियत इससे बहुत दूर थी.
ईरान ने पाकिस्तानी जमीन पर किसी भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने से साफ इनकार कर दिया है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिका की शर्तों को 'अस्वीकार्य' बता दिया. इससे पाकिस्तान के कथित राजनयिक प्रयास पूरी तरह हाशिए पर पहुंच गए हैं.
आर्थिक संकट में नया झटका
यह कूटनीतिक असफलता पाकिस्तान के लिए और भी मुश्किल समय में आई है. देश पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहा है. संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से एक महीने के अंदर अपने बकाया कर्ज चुकाने को कहा है.
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने इस महीने के अंत तक यूएई को 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर लौटाने का फैसला किया है. एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने इसे 'राष्ट्रीय गरिमा' बचाने का कदम बताया और कहा कि आर्थिक फायदे के लिए गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता.
विदेशी मुद्रा भंडार पर असर
सुधीर ने अपनी यूएई वाली अनुभव के आधार पर कहा कि अबू धाबी पाकिस्तान के प्रति पहले काफी उदार रहा है, लेकिन हर चीज की एक सीमा होती है. अब वह समय आ गया है जब पाकिस्तान को कर्ज चुकाना ही पड़ेगा.
पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल करीब 16.3 अरब डॉलर है. 3.5 अरब डॉलर चुकाने से इसमें लगभग 18 फीसदी की कमी आ सकती है. इससे आयात क्षमता और बाहरी सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा.


