खाड़ी में गरजी तेहरान की आवाज, अमेरिकी युद्धपोत डुबोने की दी खुली चेतावनी
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर तेज हो गया है। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने खाड़ी में तैनात अमेरिकी युद्धपोत को डुबोने की चेतावनी दी है। इसी बीच जिनेवा में बातचीत भी शुरू हुई है।

तेहरान से मंगलवार को एक सख्त संदेश आया। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो खाड़ी में मौजूद अमेरिकी युद्धपोत डुबो दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युद्धपोत खतरनाक होते हैं, लेकिन उन्हें डुबोने की ताकत उससे भी ज्यादा खतरनाक होती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बढ़ी है। हाल के दिनों में क्षेत्र में तनाव साफ दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच भरोसा लगभग खत्म है।
क्या बातचीत के साथ चल रही है ताकत की राजनीति?
दिलचस्प बात यह है कि बयानबाजी के बीच जिनेवा में बातचीत भी शुरू हुई है। यह बातचीत ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को लेकर है। दोनों देश सीधे आमने-सामने नहीं बैठे हैं। बातचीत इनडायरेक्ट तरीके से हो रही है। ओमान इसकी मध्यस्थता कर रहा है। अमेरिका की तरफ से खास दूत शामिल हैं। ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराकची मौजूद हैं।
क्या ट्रंप का दबाव बढ़ा रहा है तनाव?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में कहा कि ईरान में शासन परिवर्तन सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर डील नहीं हुई तो अमेरिका सख्त कदम उठा सकता है। ट्रंप ने बी-2 बॉम्बर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले भी कार्रवाई की गई है। यह बयान तेहरान को सीधा संदेश माना जा रहा है। ईरान ने इसे उकसावे के तौर पर लिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों अहम है?
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य ड्रिल भी की है। वही रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। अगर यहां तनाव बढ़ता है तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। तेल की कीमतें ऊपर जा सकती हैं। खाड़ी में जहाजों की आवाजाही पहले से ही नजर में है। ऐसे में हर सैन्य गतिविधि पर दुनिया की नजर है।
क्या नाकाम होगी सरकार बदलने की कोशिश ?
खामेनेई ने साफ कहा कि अमेरिका जबरदस्ती उनकी सरकार नहीं हटा सकता। दुनिया की सबसे ताकतवर सेना को भी कभी-कभी ऐसा झटका लगता है कि वह संभल नहीं पाती। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान की व्यवस्था अलग रही है। वहां धार्मिक नेतृत्व की मजबूत पकड़ है। बाहरी दबाव वहां अक्सर उल्टा असर करता है।
क्या डील के लिए तैयार है तेहरान?
सूत्रों का कहना है कि जिनेवा बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका कितनी नरमी दिखाता है। ईरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटें। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी न्यूक्लियर क्षमता सीमित करे। दोनों के बीच भरोसे की कमी बड़ी बाधा है। लेकिन दोनों पक्ष खुला टकराव भी नहीं चाहते। इसलिए बातचीत जारी है।
खाड़ी में सैन्य तैयारी है। जिनेवा में कूटनीति चल रही है। बयान सख्त हैं, लेकिन दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए। अगर डील होती है तो तनाव कम हो सकता है। अगर बातचीत टूटती है तो हालात बिगड़ सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजर तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी है। यह सिर्फ दो देशों का मसला नहीं है, पूरी दुनिया इससे जुड़ी है।


