बिहार चुनाव में सीट बंटवारे पर चिराग और भाजपा में खींचतान ने बढ़ाई सियासी गर्मी
बिहार चुनाव से पहले एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर चिराग पासवान और भाजपा के बीच लंबी खींचतान जारी है। चिराग अपनी पसंदीदा सीटों पर अड़े हैं और भाजपा असमंजस में है।

National News: बिहार चुनाव के मैदान में चिराग पासवान इस बार सबसे अहम साथी बनकर उभरे हैं। उनकी कुछ खास सीटों की मांग ने एनडीए में उलझन पैदा कर दी है। भाजपा चाहकर भी उन्हें मनाने में सफल नहीं हो पा रही है। लगातार कोशिशों के बावजूद चिराग अपनी शर्तों से पीछे नहीं हट रहे। इससे सीट बंटवारे की घोषणा टलती जा रही है। चिराग का यह रुख दिखाता है कि उनकी पार्टी इस चुनाव में बड़ी हिस्सेदारी चाहती है।
भाजपा नेताओं की लगातार कोशिशें
कुछ दिनों में भाजपा के नेता चिराग पासवान के घर कई बार पहुंचे। नित्यानंद राय से लेकर धर्मेंद्र प्रधान तक ने उनसे मुलाकात की। इसके बावजूद सीटों का फॉर्मूला तय नहीं हो सका। भाजपा ने 22 सीटों का प्रस्ताव रखा, लेकिन चिराग इससे संतुष्ट नहीं हैं। वे और सीटें चाहते हैं। भाजपा के लिए यह पेच मुश्किल बन गया है क्योंकि चिराग का असर कई क्षेत्रों में निर्णायक है।
क्यों हो रही बातचीत में देरी
चिराग पासवान ने खुद माना कि बातचीत लंबी चल रही है। उन्होंने कहा कि वे हर मुद्दे को पहले साफ करना चाहते हैं ताकि चुनाव के दौरान विवाद न हो। सीटों के साथ-साथ प्रचार की रणनीति और जिम्मेदारियों पर भी चर्चा चल रही है। उनका कहना है कि यह सब पहले तय करना जरूरी है ताकि बाद में कोई मतभेद न हो। उनकी इस साफगोई को उनके समर्थक गंभीर नेतृत्व का संकेत मानते हैं।
दो सीटों पर सबसे बड़ा पेच
जमुई जिले की चकाई और सिकंदरा सीट चिराग पासवान के लिए बेहद अहम हैं। यही वजह है कि वे इन्हें हर हाल में चाहते हैं। भाजपा इस पर राज़ी नहीं हो रही। पहले चिराग ने 30 से ज्यादा सीटों की मांग की थी, लेकिन अब वे 26 पर मानते दिख रहे हैं। इसके बावजूद इन दो सीटों को लेकर पेच फंसा है। यह टकराव तय करेगा कि एनडीए का चेहरा कैसा होगा।
सकारात्मक संकेत भी सामने आए
तनाव के बीच बातचीत को लेकर दोनों पक्षों से सकारात्मक बयान भी आए हैं। चिराग ने कहा कि चर्चा आखिरी दौर में है और माहौल अच्छा है। भाजपा नेताओं ने भी कहा कि सब कुछ सही दिशा में बढ़ रहा है। नित्यानंद राय ने तो यहां तक कहा कि चिराग पासवान की योजना बिहार में एनडीए सरकार बनाने की है। इन संकेतों से लगता है कि हल जल्द निकल सकता है।
मोदी फैक्टर बना सबसे बड़ा सहारा
चिराग ने साफ किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके नेता हैं और जहां मोदी हैं, वहां सम्मान की चिंता नहीं है। उनके इस बयान को भाजपा को संदेश माना जा रहा है। चिराग अपने समर्थकों को भी भरोसा दिलाना चाहते हैं कि वे एनडीए से बाहर नहीं जाएंगे। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि चिराग मोदी के नाम को ढाल बनाकर ज्यादा सीटें निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
अब सबकी नजर अंतिम फैसले पर
बिहार चुनाव का समय नजदीक है और अब सभी को एनडीए के सीट बंटवारे की घोषणा का इंतजार है। देरी से कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ रही है। भाजपा भी समझती है कि समझौता जरूरी है वरना नुकसान होगा। माना जा रहा है कि भाजपा कुछ और सीटों पर समझौता कर सकती है। अब देखना यह है कि चिराग की जिद पर भाजपा कितनी झुकती है और कब इस खींचतान का अंत होता है।


