बिहार के मंत्रिमंडल विस्तार में दिखेगा नया सामाजिक संतुलन, नए चेहरे और जातीय समीकरण से बदल सकती है सियासत
बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है, जहां जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है.

बिहार की राजनीति एक बार फिर हलचल से भरी हुई है. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और सियासी गलियारों में यह माना जा रहा है कि इस बार सरकार का स्वरूप कुछ बदला हुआ नजर आ सकता है. खासकर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
सूत्रों के अनुसार, सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दे सकती है. अगड़ी, पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है. जहां एक ओर जनता दल (यूनाइटेड) अपने पुराने और अनुभवी नेताओं पर भरोसा बनाए रखने के मूड में दिख रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी नए और पुराने चेहरों के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.
बीजेपी की नजर क्षेत्रीय समीकरण पर
भारतीय जनता पार्टी अपने मंत्रियों के चयन में क्षेत्रीय समीकरण को भी ध्यान में रख रही है. उदाहरण के तौर पर, मगध क्षेत्र में पार्टी ने पहले ही अति पिछड़े वर्ग को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है. ऐसे में अब इस क्षेत्र से किसी सवर्ण विधायक को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है.
बताया जा रहा है कि जिन जिलों में पार्टी ने 2025 के विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है, वहां से प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. इसी तरह तिरहुत प्रमंडल को लेकर भी चर्चाएं हैं. तिरहुत इलाके से पिछली बार अति पिछड़ा वर्ग की महिला मंत्री रही थीं. अब इस बार यहां से सवर्ण वर्ग के किसी विधायक को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है.
दरभंगा और महिला प्रतिनिधित्व पर चर्चा
दरभंगा क्षेत्र से किसी ब्राह्मण नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की भी अटकलें हैं. भाजपा पहले भी अपने कोटे से ब्राह्मण समाज के नेताओं को मंत्री बना चुकी है, इसलिए इस बार भी इस परंपरा को जारी रखने की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा, एक महिला विधान पार्षद को भी इस बार मंत्रिमंडल में जगह मिलने की चर्चा है. अब तक उन्हें मंत्री पद नहीं मिला है, ऐसे में उन्हें मौका दिया जा सकता है.
जदयू में पुराने और नए चेहरों का मिश्रण
जनता दल यूनाइटेड के भीतर भी मंत्रिमंडल को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है. पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को फिर से मंत्री बनाए जाने की संभावना है. इनमें वे नेता शामिल हैं, जो पहले भी कई बार मंत्री रह चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक, ऐसे नेताओं की संख्या 8 से 9 के बीच हो सकती है. हालांकि, इसके साथ ही पार्टी कुछ नए चेहरों को भी मौका देने पर विचार कर रही है.
जदयू के कई युवा विधायक, जो पहली बार चुनाव जीतकर आए हैं, इस बार मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं. खास बात यह है कि ऐसे विधायकों को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिन्होंने अच्छे शैक्षणिक संस्थानों से पढ़ाई की है. इस कदम को पार्टी की नई सोच और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की दिशा में एक प्रयास माना जा रहा है.
अन्य सहयोगी दलों में बदलाव की संभावना कम
एनडीए के अन्य घटक दलों- लोजपा (रामविलास), रालोमो और हम के कोटे में फिलहाल किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है. हालांकि, लोजपा (रामविलास) को लेकर कुछ चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अफवाह करार दिया है. रालोमो की ओर से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है. वहीं, हम पार्टी की ओर से जीतन राम मांझी के बेटे संतोष मांझी को भी पहले से तय योजना के तहत मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.


