BMC में बीजेपी की बंपर जीत, निशिकांत दुबे बोले 'अब मुंबई आकर मिलूंगा'
BMC चुनावों के रुझानों से BJP के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को साफ बहुमत मिल रहा है इस बीच, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने ठाकरे भाइयों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसे राजनीतिक गलियारों में एक सीधी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है.

मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों के ताजा रुझानों में भाजपा नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है. इसी बीच भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ठाकरे बंधुओं को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसे सियासी हलकों में सीधे-सीधे चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है. उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया सियासी तापमान बढ़ा दिया है.
महायुति की बढ़त के साथ ही निशिकांत दुबे ने संकेत दिया है कि मुंबई की सत्ता में लंबे समय से चला आ रहा ‘ठाकरे युग’ अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. उनके बयान को हालिया भाषा विवाद और पहले दिए गए बयानों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसने इस राजनीतिक टकराव को और मुखर कर दिया है.
BMC में बंपर बढ़त, निशिकांत दुबे का सियासी हमला
बीएमसी चुनावों में भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन 115 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बहुमत के आंकड़े 114 से अधिक है. इस बढ़त को देखते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ‘X’ पर पोस्ट करते हुए जीत की खुशी जाहिर की और लिखा कि वे जल्द ही मुंबई आकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे से मिलेंगे. उनके इस बयान को राजनीतिक संदेश और शक्ति प्रदर्शन दोनों के तौर पर देखा जा रहा है.
मुम्बई आकर उद्धव ठाकरे जी तथा राज ठाकरे जी से मिलूँगा
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) January 16, 2026
‘मुंबई अब किसी एक परिवार की जागीर नहीं’
निशिकांत दुबे के पोस्ट के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं कि मुंबई अब किसी एक परिवार या ‘भाषावाद’ की राजनीति तक सीमित नहीं रही है. भाजपा के अनुसार, मतदाताओं ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर भरोसा जताया है. यही वजह है कि ठाकरे बंधुओं की संयुक्त रणनीति भी महायुति की लहर को रोकने में नाकाम रही.
राज–उद्धव की जोड़ी क्यों नहीं चली?
चुनावी रुझानों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की एमएनएस मिलकर लगभग 68 सीटों पर ही सिमटती दिख रही है, जबकि कांग्रेस को करीब 10 सीटें मिलती नजर आ रही हैं. नागपुर, ठाणे और पुणे जैसे प्रमुख नगर निगमों में भी भाजपा गठबंधन मजबूत स्थिति में है. इससे साफ है कि ‘मराठी कार्ड’ और ठाकरे बंधुओं की एकजुटता अपेक्षित असर नहीं दिखा सकी.
'पटक-पटक कर मारेंगे' बयान से जुड़ा पुराना विवाद
इस सियासी टकराव की जड़ बीते साल जुलाई में दिए गए निशिकांत दुबे के उस बयान से जुड़ी है, जब उन्होंने गैर-मराठी दुकानदार की पिटाई के मामले पर कड़ा विरोध जताया था. उस समय उन्होंने कहा था, "हिम्मत है तो उर्दू या दक्षिण भारतीय भाषा बोलने वालों को मारो. यूपी-बिहार आओगे तो पटक-पटक कर मारेंगे."
अब बीएमसी और महाराष्ट्र के चुनावी रुझानों में बढ़त के बीच उनका मुंबई आने का ऐलान उसी बयान की राजनीतिक गूंज के रूप में देखा जा रहा है.
राजनीतिक संकेत साफ
महायुति की बढ़त और निशिकांत दुबे के आक्रामक तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में बड़ा बदलाव हो रहा है. आने वाले दिनों में यह टकराव और तीखा हो सकता है, खासकर तब जब बीएमसी के अंतिम नतीजे सामने आएंगे.


