पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक, 25 आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
5 जनवरी 2022 को पीएम मोदी फिरोजपुर में एक रैली को संबोधित करने के लिए सड़क मार्ग से आ रह थे. बीच रास्ते में प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को बीच सड़क पर रोक दिया था. करीब आधा घंटे तक काफिला रुका रहा.

पंजाब पुलिस ने तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक मामले में 25 आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास (आईपीसी धारा-307) सहित 6 और गंभीर धाराएं जोड़ी हैं, जिससे केस मजबूत हो गया है.
पुलिस अब इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जांच कर रही है. मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा-307 (हत्या का प्रयास), 353 (लोक सेवक को उसके काम में रुकावट डालना), 341 (जबरन रास्ता रोकना), 186 (लोक सेवक के काम में रुकावट डालना), 149 (गैर कानूनी तरीके से एकत्र होना) और 8-बी नेशनल हाईवे एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं.
पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक
5 जनवरी 2022 को पीएम मोदी फिरोजपुर में एक रैली को संबोधित करने के लिए सड़क मार्ग से आ रहे थे. रास्ते में घल खुर्द तहसील के पास फ्लाईओवर पर कई लोग एकत्र हो गए थे, जिससे पीएम मोदी को करीब आधे घंटे तक वहां रुकना पड़ा. उस वक्त दिल्ली लौटने से पहले पीएम मोदी ने पंजाब के अधिकारियों से कहा था कि वे मुख्यमंत्री से कहें कि वह बठिंडा एयरपोर्ट तक सुरक्षित पहुंचे. उस समय राज्य में चरणजीत सिंह चन्नी की कांग्रेस सरकार थी.
25 आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
पहले पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ 6 जनवरी 2022 को मामला दर्ज किया था. जांच के दौरान 26 लोगों की पहचान की गई, जिन्होंने पीएम मोदी के काफिले को रोकने के लिए सड़क पर इकट्ठा किया था. इनमें भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी और पेंडू मजदूर यूनियन के नेता और समर्थक शामिल थे, जिनमें बलदेव सिंह जीरा, बीकेयू क्रांतिकारी के महासचिव का नाम भी था.
सुरक्षा चूक मामले में जांच तेज
पंजाब सरकार अब सुरक्षा चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी जांच कर रही है. इसके लिए पंजाब मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संत प्रकाश को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन साल पहले जांच समिति गठित की गई थी, जिसके आधार पर यह कदम उठाया गया है. दोषी अधिकारियों में पूर्व डीजीपी एस चट्टोपाध्याय, फरीदकोट के तत्कालीन डीआईजी इंद्रबीर सिंह और फिरोजपुर के तत्कालीन एसएसपी हरमबीर सिंह हंस शामिल हैं.
जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2022 में सुरक्षा चूक की जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई थी, जिसमें इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता थी. इस समिति ने दोषी अधिकारियों पर बड़े जुर्माने की सिफारिश की थी और मार्च 2022 में अपनी रिपोर्ट दी थी, जिसमें इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सलाह दी गई थी.


