कश्मीर में चिल्ला-ए-कलां की शुरुआत: 40 दिनों की हाड़ कंपकंपाती ठंड, बारिश और बर्फबारी से सूखे को मिली राहत

श्रीनगर और कश्मीर घाटी के कई इलाकों में रात भर हल्की-हल्की बारिश हुई, जो सुबह तक रुक-रुक कर जारी रही. मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में बारिश और बर्फबारी के तेज होने की संभावना जताई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: कश्मीर में सर्दी के सबसे कठोर और लंबे दौर चिल्ला-ए-कलां की शुरुआत हो चुकी है. यह 40 दिनों की अवधि 21–22 दिसंबर की रात से मानी जाती है, जिसके साथ ही घाटी में ठंड अपने चरम पर पहुंचने लगती है. पहले से ही ठिठुर रही कश्मीर घाटी में अब लोगों की चिंता बढ़ गई है कि इस बार चिल्ला-ए-कलां कितनी सख्त साबित होगी.

चिल्ला-ए-कलां एक फारसी शब्द है, जिसका अर्थ प्रचंड ठंड होता है. इस दौरान तापमान अक्सर शून्य से नीचे चला जाता है और जनजीवन पर गहरा असर पड़ता है. मौसम विभाग और स्थानीय लोगों की निगाहें अब आने वाले हफ्तों पर टिकी हैं, क्योंकि यही समय कश्मीर की सर्दी की दिशा तय करता है.

क्या है चिल्ला-ए-कलां?

चिल्ला-ए-कलां करीब 40 दिनों तक चलता है, जिसके बाद चिल्ले खुर्द और फिर चिल्ले बच्चा का दौर आता है. आमतौर पर इस अवधि में तापमान शून्य से 5–6 डिग्री नीचे तक गिर जाता है. इतिहास में सबसे अधिक ठंड वर्ष 1986 में दर्ज की गई थी, जब तापमान शून्य से 9 डिग्री नीचे चला गया था और डल झील पूरी तरह जम गई थी.

अगले एक सप्ताह में भारी बर्फबारी की संभावना

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले एक सप्ताह में घाटी में भारी बर्फबारी हो सकती है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए मध्यम बारिश और हिमपात का पूर्वानुमान जताया है. अनुमान है कि अगले 40 दिनों तक न्यूनतम और अधिकतम तापमान में लगातार गिरावट देखने को मिलेगी.

जलवायु परिवर्तन का असर

हाल के वर्षों में यह देखा गया है कि चिल्ला-ए-कलां के बजाय चिल्ले खुर्द और चिल्ले बच्चा के दौरान अधिक बर्फबारी हो रही है. विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मानते हैं, जिससे पारंपरिक मौसम चक्र में बदलाव नजर आ रहा है.

लौट रही पारंपरिक तैयारियां

पहले कश्मीरी परिवार चिल्ला-ए-कलां से पहले सब्जियां सुखाकर और जरूरी सामान का भंडारण कर लेते थे. मौसम में बदलाव के चलते यह परंपरा कमजोर पड़ी थी, लेकिन अब एक बार फिर सूखी सब्जियों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ रही है.

सर्दियों का स्वाद: हरिसा

सर्दियों में धीमी आंच पर पकने वाला पारंपरिक व्यंजन हरिसा कश्मीर की पहचान बन जाता है. गोश्त, चावल और मसालों से तैयार यह व्यंजन शरीर को गर्म रखने में मदद करता है. इसके अलावा सूखी सब्जियां और सूखी मछली भी सर्दियों के बाजारों में खूब बिक रही हैं.

बारिश और बर्फबारी को माना जा रहा शुभ संकेत

रविवार से श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में रुक-रुक कर हल्की बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में बारिश और बर्फबारी के और तेज होने का अनुमान जताया है. चिल्ला-ए-कलां के पहले दिन हुई बारिश और बर्फबारी को स्थानीय लोग शुभ संकेत मानते हैं और इसे अच्छी बर्फबारी का अग्रदूत समझते हैं.

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