3 तीन दिन में आनी थी जांच रिपोर्ट 7 दिन बीत गए, क्या गुनाहगार बच गए ?
मालवीय नगर अग्निकांड की जांच रिपोर्ट सात दिन बाद भी तैयार नहीं हो पाई है। होटल में एक्सपायर्ड फायर एक्सटिंग्विशर और लाइसेंस उल्लंघन सामने आए हैं। MCD अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं और जांच रिपोर्ट में देरी से कार्रवाई अटकी हुई है।

नई दिल्ली : क्या मालवीय नगर अग्रिकांड में अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है? क्या इस भयावह हादसे के बाद होटल के मालिक को क्लीन चिट देने की अंदर-अंदर ही प्लानिंग हो रही है? अगर नहीं तो तीन में आनी वाली जांच रिपोर्ट सात दिन बाद भी क्यों नहीं आई ? मालवीय नगर अग्निकांड की जांच रिपोर्ट तीन दिन में आनी थी, लेकिन सात दिन बाद भी एमसीडी अधिकारियों के हाथ खाली है। मामले में पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि 3 जून की सुबह होटल में आग की शुरुआत ग्राउंड फ्लोर से हुई। ग्राउंड फ्लोर पर आग बुझाने के लिए जो फायर एक्सटिंग्विशर रखे थे, वे एक्सपायर्ड थे।फ्लोरिश होटल को दो तरह के लाइसेंस मिले हुए थे। दिल्ली सरकार से 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' का लाइसेंस था, जबकि दूसरा लाइसेंस एमसीडी के पब्लिक हेल्थ विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से लिया गया था। होटल में दोनों लाइसेंस की धज्जियां उड़ाई गई थीं। 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' के लाइसेंस के तहत सिर्फ छह रूम बनाने की इजाजत मिली थी, जबकि होटल में लगभग 25 रूम बने थे।
बिल्डिंग बायलॉज का भी हो रहा था उल्लंघन
वहीं, एमसीडी से टी एंड स्नैक्स का लाइसेंस लिया गया था, लेकिन होटल के ग्राउंड फ्लोर पर रेस्टोरेंट चल रहा था।
होटल मालिक की यही लापरवाही वहां रहने वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हुई। हैरानी की बात ये है कि होटल मालिक पिछले कई साल से लाइसेंस नियमों के साथ-साथ बिल्डिंग बायलॉज की भी धज्जियां उड़ा रहा था, लेकिन एमसीडी से लेकर दिल्ली सरकार के किसी भी विभाग ने इसकी जांच नहीं की।
आनन-फानन में बनी एक रिपोर्ट
हादसों के बाद मेयर प्रवेक्ष वाही ने तीन दिन में एमसीडी अधिकारियों से जांच रिपोर्ट तलब की थी, लेकिन सात दिन बीतने के बाद भी अब तक कोई रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है। इस वजह से इस हादसे के लिए जिम्मेदार पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं हो पाया। सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों आनन-फानन में एक रिपोर्ट तैयार कर एमसीडी के सीनियर अधिकारियों के पास भेजी गई थी। अधिकारियों ने यही रिपोर्ट एमसीडी कमिश्नर ऑफिस में भेजी थी। रिपोर्ट में कई तरह की खामियां मिलने पर एमसीडी कमिश्नर ने डिटेल रिपोर्ट दोबारा तैयार करने का आदेश दिया, लेकिन अब तक रिपोर्ट का कुछ पता नहीं है।


