मणिपुर में 6 लापता नागा बंधकों के शव मिलने से भड़का गुस्सा, सड़कों पर उतरे हजारों लोग
मणिपुर में लापता छह नागा नागरिकों के शव मिलने के बाद राज्य में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं और कई इलाकों में तनाव चरम पर पहुंच गया है. इस घटना ने पहले से जारी जातीय संघर्ष को और भड़का दिया है.

मणिपुर: एक बार फिर मणिपुर में हिंसा और तनाव ने गंभीर रूप ले लिया है. लंबे समय से लापता छह नागा नागरिकों के शव मिलने के बाद राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. इस घटना से लोगों में गहरा आक्रोश है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है.
सर्च ऑपरेशन के बाद मिली बड़ी सफलता
पुलिस, सीआरपीएफ और असम राइफल्स के संयुक्त अभियान के तहत करीब 450 जवानों ने व्यापक तलाशी अभियान चलाया. स्निफर डॉग्स और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से लगभग 24 घंटे तक चले अभियान के बाद छह शव बरामद किए गए. अधिकारियों के अनुसार, शवों की पहचान लापता नागा नागरिकों के रूप में की गई है.
मई में शुरू हुआ था बंधक संकट
यह मामला 13 मई 2026 से जुड़ा हुआ है, जब कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच तनाव बढ़ गया था. इसी दौरान 48 से अधिक लोगों को बंधक बनाए जाने की खबर सामने आई थी. घटना से पहले शांति वार्ता से लौट रहे तीन चर्च नेताओं की हत्या ने हालात को और अधिक गंभीर बना दिया था.
रिहाई की उम्मीद टूटी
हाल ही में नागा संगठनों ने मानवीय आधार पर 14 कुकी बंधकों को रिहा कर दिया था. इसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि छह नागा नागरिकों को भी सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा. हालांकि, अगले ही दिन उनके शव मिलने की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया.
सड़कों पर उतरे लोग, सरकार पर उठे सवाल
घटना के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर धरना देकर प्रदर्शनकारियों ने राज्य और केंद्र सरकार पर बंधकों को बचाने में विफल रहने का आरोप लगाया. आर्थिक नाकेबंदी और विरोध प्रदर्शनों के कारण कई इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ है.
लंबे समय से हिंसा की चपेट में मणिपुर
मणिपुर पिछले तीन वर्षों से जातीय संघर्ष और हिंसा का सामना कर रहा है. इस दौरान सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों परिवार अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं. ताजा घटना ने एक बार फिर राज्य में शांति और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. प्रशासन हालात सामान्य करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लोगों में अभी भी भय और गुस्सा बना हुआ है.


