दिल्ली, यूपी, बिहार और बंगाल को जोड़ने वाली सुपरफास्ट बुलेट ट्रेन का ऐलान, अब 20 घंटे का सफर सिर्फ 6 घंटे में होगा पूरा

दिल्ली से सिलीगुड़ी तक नई बुलेट ट्रेन परियोजना के ऐलान से उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच सफर काफी तेज और आसान हो जाएगा. इस हाईस्पीड ट्रेन के शुरू होने के बाद 1500 किलोमीटर की दूरी महज 6 से 7 घंटे में पूरी की जा सकेगी.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दिल्ली से सिलीगुड़ी तक नई बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी शुरू कर दी है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कोलकाता दौरे के दौरान इस हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान किया. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बाद यह देश की दूसरी सबसे बड़ी हाईस्पीड ट्रेन परियोजना मानी जा रही है. यह ट्रेन दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगी. इसके शुरू होने के बाद लंबी दूरी का सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा.

20 घंटे का सफर अब सिर्फ 6 घंटे में

फिलहाल दिल्ली से सिलीगुड़ी तक राजधानी और दुरंतो जैसी ट्रेनों से पहुंचने में करीब 18 से 20 घंटे लगते हैं, लेकिन बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद यही 1500 किलोमीटर लंबा सफर सिर्फ 6 से 7 घंटे में पूरा हो सकेगा.

इस ट्रेन की संभावित रफ्तार 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है. अनुमान है कि दिल्ली से वाराणसी का सफर लगभग 3 घंटे 50 मिनट और दिल्ली से पटना का सफर करीब 4 घंटे 20 मिनट में पूरा होगा.

किन शहरों को मिलेगा फायदा?

दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन रूट में कई बड़े शहर शामिल होंगे. यह ट्रेन नई दिल्ली से चलकर नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर और पटना होते हुए सिलीगुड़ी पहुंचेगी.

प्रस्तावित स्टेशन

  • नई दिल्ली
  • नोएडा (जेवर एयरपोर्ट)
  • मथुरा
  • आगरा
  • इटावा
  • लखनऊ
  • प्रयागराज
  • वाराणसी
  • गाजीपुर
  • पटना
  • सिलीगुड़ी

पूर्वोत्तर भारत को मिलेगा बड़ा लाभ

सिलीगुड़ी को पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है। इसे ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ भी कहा जाता है. ऐसे में यह बुलेट ट्रेन परियोजना सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार, पर्यटन और सेना की आवाजाही के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

रेलवे परियोजनाओं पर बड़ा निवेश

रेल मंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल में बुलेट ट्रेन समेत कई रेल परियोजनाओं पर एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया जा रहा है. साथ ही भूमि अधिग्रहण और रूट अलाइनमेंट का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा. सरकार का दावा है कि इस परियोजना से उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत के बीच कनेक्टिविटी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी.

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