'मंदिर-मस्जिद से नहीं जीते जाते चुनाव'-दिलीप घोष के बयान से बंगाल BJP में हलचल
बंगाल भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के एक बयान ने पार्टी के भीतर सियासी हलचल बढ़ा दी है. उन्होंने साफ कहा है कि “मंदिर–मस्जिद के मुद्दे चुनावों को प्रभावित नहीं करते” और इसे चुनावी सफलता का पैमाना मानना गलत है.

कोलकाता: बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान ने एक बार फिर पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी है. बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद घोष ने कहा कि "मंदिर–मस्जिद के मुद्दे चुनावों को प्रभावित नहीं करते" और इसे चुनावी सफलता का पैमाना मानना गलत है. इतना ही नहीं उन्होंने हाल ही में पार्टी में शामिल नए सदस्यों के ऊपर भी तंज कसा.
दिलीप घोष ने न सिर्फ धार्मिक मुद्दों की चुनावी प्रासंगिकता पर सवाल उठाए, बल्कि बंगाल भाजपा में हाल के वर्षों में शामिल हुए नेताओं पर भी परोक्ष तंज कसा. उनका बयान ऐसे समय आया हैं, जब पार्टी 2026 के विधानसभा चुनावों की रणनीति बनाने में जुटी है.
'मंदिर–मस्जिद से नहीं तय होते चुनावी नतीजे'
दिलीप घोष ने गुरुवार को कहा, "मंदिर–मस्जिद के मुद्दे चुनाव परिणामों को प्रभावित नहीं करते हैं."
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा. उनके मुताबिक, यह मानना भी "गलत होगा" कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केवल मंदिर निर्माण के जरिए 2026 का विधानसभा चुनाव जीत सकती हैं.
भाजपा में 'नए चेहरों' पर परोक्ष तंज
किसी का नाम लिए बिना घोष ने कहा, "भाजपा में हर कोई कार्यकर्ता है. नए सदस्यों को अपनी पहचान साबित करनी होगी."
उनकी इस टिप्पणी को 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेताओं पर कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है.
2026 चुनाव लड़ने के संकेत, खड़गपुर से तैयारी
दिलीप घोष ने राज्य भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य से मुलाकात कर शनिवार से तीन दिनों तक खड़गपुर में प्रचार करने की अनुमति मांगी है. उन्होंने साफ किया कि वह 2026 के विधानसभा चुनाव में अपनी गृह सीट से मैदान में उतरना चाहते हैं.
दरकिनार किए जाने पर खुलकर बोले घोष
पार्टी में अपनी भूमिका को लेकर घोष ने कहा, "बेबुनियाद, एजेंडा-आधारित अफवाहें फैलाई गईं और मुझे अलग-थलग कर दिया गया. मैंने यह बात केंद्र के उच्च अधिकारियों को बता दी है. मुझे पीछे छूट जाने का डर नहीं है. मुझे उन पर भरोसा है."
उनका यह बयान भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करता है.
जनवरी में बंगाल में भाजपा का सियासी जमावड़ा
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी के तीसरे सप्ताह में उत्तर बंगाल में रैली कर सकते हैं. वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह महीने के अंत तक कोलकाता का दौरा कर सकते हैं. इसके अलावा भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के 8 जनवरी को कोलकाता आने की भी संभावना है.


