झूठा लोन, फर्जी कंपनी: I-PAC की फाइनेंशियल गड़बड़ी पर सवालों की बौछार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा नाम रही I-PAC फिर सुर्खियों में है. एक हैरान करने वाली रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में इसने हरियाणा के रोहतक की एक कंपनी से 13.50 करोड़ रुपये का अनसिक्योर्ड लोन लिया था. लेकिन सरकारी रिकॉर्ड खंगालने पर उस कंपनी का ही नहीं मिला. लेकिन क्यों?

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहम भूमिका निभा चुकी संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि I-PAC ने वर्ष 2021 में हरियाणा के रोहतक स्थित एक कंपनी से 13.50 करोड़ रुपये का अनसिक्योर्ड लोन लिया था, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उस नाम की किसी कंपनी का कोई अस्तित्व ही नहीं मिलता.

इस कथित लेनदेन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. डॉक्यूमेंट और आधिकारिक रिकॉर्ड की पड़ताल में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो I-PAC के दावों पर संदेह पैदा करते हैं. यह मामला ऐसे वक्त सामने आया है, जब ईडी पहले से ही I-PAC और उसके निदेशकों से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है.

मीडिया रिपोर्ट में हुआ खुलासा

मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, I-PAC ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को सौंपे गए डॉक्यूमेंट में यह दावा किया है कि उसने रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड नाम की कंपनी से 13.50 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. डॉक्यूमेंट में कंपनी का पता तीसरी मंजिल, अशोका प्लाजा, दिल्ली रोड, रोहतक, हरियाणा दर्ज है.

रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2021 में इस कर्ज की एंट्री दिखाई गई, जबकि जून 2025 के डॉक्यूमेंट में दावा किया गया कि इसमें से 1 करोड़ रुपये की राशि चुका दी गई है.

सरकारी रिकॉर्ड में नहीं मिली कंपनी

जब इस दावे की गहराई से जांच की गई, तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई. आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड नाम की कोई कंपनी कभी रजिस्टर ही नहीं हुई.

हालांकि, उसी पते पर रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी जरूर दर्ज थी, लेकिन उसे अगस्त 2018 में ही ROC के रिकॉर्ड से हटा दिया गया था. यानी जिस कंपनी से लोन लेने का दावा किया गया, वह लोन दिखाने से करीब तीन साल पहले ही बंद हो चुकी थी.

शेयरधारकों ने लेनदेन से किया इनकार

बंद हो चुकी इस कंपनी के सभी छह शेयरधारकों ने I-PAC के साथ किसी भी तरह के लेनदेन या कर्ज देने की बात से साफ इनकार किया है. शेयरधारकों का कहना है कि यह कंपनी जमीन से जुड़े काम के लिए बनाई गई थी, लेकिन बिना किसी व्यावसायिक गतिविधि के जल्द ही बंद कर दी गई.

I-PAC की ओर से जवाब

इस पूरे मामले पर जब इंडियन एक्सप्रेस ने I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक प्रतीक जैन से संपर्क किया, तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. वहीं I-PAC की चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी ने भी इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

कैसे सामने आया मामला?

यह खुलासा ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रवर्तन निदेशालय पहले से ही I-PAC और उसके निदेशकों के खिलाफ कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रहा है. हाल ही में 8 जनवरी को हुई छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है.

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