ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर गोवा में सोशल मीडिया बैन की तैयारी? 16 साल से कम बच्चों के लिए सरकार बना रही नीति
गोवा में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की संभावना पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है. बढ़ती डिजिटल लत, साइबरबुलिंग और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े खतरों को देखते हुए राज्य सरकार इस मुद्दे पर नीतिगत ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है.

नई दिल्ली: गोवा में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है. राज्य सरकार इस मुद्दे पर नीतिगत ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. बढ़ती डिजिटल लत, साइबरबुलिंग और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े खतरों को देखते हुए यह पहल की जा रही है.
गोवा के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रोहन खौंटे ने सोमवार को संकेत दिए कि सरकार इस विषय पर व्यापक अध्ययन कर सकती है. उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त कदमों पर विचार किया जा रहा है.
16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर लग सकता है प्रतिबंध
मंत्री रोहन खौंटे ने कहा कि राज्य सरकार 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के इंटरनेट मीडिया उपयोग को सीमित करने की संभावना का अध्ययन कर रही है. उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई और कहा कि कम उम्र में अनियंत्रित सोशल मीडिया एक्सपोजर बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास पर असर डाल सकता है.
बनेगी कार्य समिति, तैयार होगा नीतिगत ढांचा
इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लेने से पहले सरकार एक कार्य समिति गठित करने की योजना बना रही है. इस समिति में शिक्षाविदों, अभिभावक-शिक्षक संघों, उद्योग जगत और सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा.
इसका उद्देश्य होगा कि व्यापक परामर्श के बाद एक संतुलित और व्यावहारिक नीति तैयार की जाए, जो बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा को भी बढ़ावा दे.
ऑस्ट्रेलिया के उदाहरण का हवाला
मंत्री ने ऑस्ट्रेलिया द्वारा 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया पर प्रतिबंध जैसे वैश्विक उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में भी इस विषय पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील विषय को व्यवस्थित और परामर्शपूर्ण तरीके से ही सुलझाया जाना चाहिए.
16 वर्ष की आयु बहुत ही नाजुक होती है
रोहन खौंटे ने कहा, '16 वर्ष की आयु बहुत ही नाजुक होती है. जब बच्चों को सीखने और समग्र विकास पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन डिजिटल लत, उम्र के हिसाब से अनुपयुक्त सामग्री के संपर्क में आना, चिंता, अवसाद और व्यक्तिगत डाटा के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों ने खतरे की घंटी बजा दी है.'
उन्होंने बताया कि कम उम्र में सोशल मीडिया की लत बच्चों को मानसिक तनाव, अवसाद और असुरक्षित ऑनलाइन वातावरण की ओर धकेल सकती है.
जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी तरह का फैसला जल्दबाजी में नहीं करेगी. उन्होंने कहा, 'हमारा उद्देश्य जल्दबाजी में कोई निर्णय लेना नहीं है, बल्कि यह जांचना है कि हम 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को इंटरनेट मीडिया के खतरों से कैसे बचा सकते हैं, साथ ही डिजिटल उपकरणों के रचनात्मक और शैक्षिक उपयोग को कैसे बढ़ावा दे सकते हैं.'
उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी निर्णय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सहित केंद्र सरकार के मौजूदा कानूनों के अनुरूप ही लिया जाएगा.


