केंद्र ने गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी के ड्राफ्ट नियम जारी किए, जानिए क्या-क्या होगा फायदा

केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी के ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं. इन नियमों के तहत गिग वर्कर्स को पंजीकरण, स्वास्थ्य और जीवन बीमा जैसी सुविधाएं मिलेंगी और उन्हें यूनिवर्सल आईडी के माध्यम से पहचान भी मिलेगी. यह कदम गिग इकॉनमी में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए बड़ी राहत साबित होगा.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: क्रिसमस और नए साल पर देशभर में हड़ताल कर रहे गिग वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार की ओर से राहत भरी खबर आई है. श्रम और रोजगार मंत्रालय ने मंगलवार को Code on Social Security (Central) Rules, 2025 के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनका मकसद गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है.

इन प्रस्तावित नियमों के जरिए गिग वर्कर्स को न सिर्फ पंजीकरण की सुविधा मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य, जीवन और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी मिल सकेगा. सरकार ने इन नियमों के जरिए गिग इकॉनमी में काम करने वाले लाखों श्रमिकों को एक औपचारिक पहचान देने की दिशा में अहम कदम उठाया है.

क्या है नया सोशल सिक्योरिटी ड्राफ्ट नियम?

श्रम मंत्रालय द्वारा जारी ड्राफ्ट नियमों में गिग वर्कर्स की पात्रता, पंजीकरण प्रक्रिया और एग्रीगेटर्स की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है. इन नियमों का उद्देश्य गिग वर्कर्स के लिए एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा ढांचा तैयार करना है.

90 या 120 दिन की न्यूनतम पात्रता तय

ड्राफ्ट के अनुसार, किसी एक एग्रीगेटर के साथ काम करने वाले गिग वर्कर को कम से कम 90 दिन काम करना होगा ताकि वह सोशल सिक्योरिटी लाभ के लिए पात्र हो सके.
वहीं, जो वर्कर्स एक से ज्यादा एग्रीगेटर्स (जैसे फूड डिलीवरी या राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म) से जुड़े हैं, उनके लिए यह सीमा 120 दिन प्रति वित्तीय वर्ष तय की गई है.

कमाई की शुरुआत से गिना जाएगा काम का दिन

नियमों में स्पष्ट किया गया है कि जिस दिन से कोई गिग वर्कर कमाई शुरू करता है, उसी दिन से उसे एग्रीगेटर के साथ जुड़ा माना जाएगा, चाहे कमाई की राशि कितनी भी हो. जिस दिन आय होगी, वह दिन पात्रता में गिना जाएगा.

एक दिन में कई प्लेटफॉर्म पर काम करने की भी गिनती

अगर कोई गिग वर्कर एक ही दिन में कई एग्रीगेटर्स के लिए काम करता है, तो हर एग्रीगेटर के लिए वह दिन अलग-अलग गिना जाएगा. यानी, एक दिन में तीन प्लेटफॉर्म पर काम करने का मतलब तीन दिन की गणना.

आधार से पंजीकरण अनिवार्य

ड्राफ्ट नियमों के तहत 16 वर्ष से अधिक उम्र के गिग वर्कर्स को आधार नंबर और जरूरी दस्तावेजों के साथ पंजीकरण कराना होगा. यह पंजीकरण एक केंद्रीय पोर्टल के जरिए किया जाएगा.

यूनिवर्सल अकाउंट नंबर और पहचान पत्र

एग्रीगेटर्स को गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का विवरण केंद्रीय पोर्टल पर साझा करना होगा, जिससे प्रत्येक वर्कर को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) या यूनिक आईडी जारी की जा सके.
पंजीकृत वर्कर्स को डिजिटल या भौतिक पहचान पत्र मिलेगा, जिसमें उनकी फोटो और जरूरी विवरण होंगे. यह कार्ड केंद्रीय पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा.

सोशल सिक्योरिटी फंड में जाएगी एग्रीगेटर्स की हिस्सेदारी

केंद्र सरकार एक अधिकारी या एजेंसी नियुक्त करेगी, जो एग्रीगेटर्स से योगदान एकत्र करेगी. यह राशि Social Security Fund में एक अलग खाते के रूप में रखी जाएगी, जो विशेष रूप से गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए होगी.

कब खत्म होगी सोशल सिक्योरिटी की पात्रता?

कोई भी पंजीकृत गिग वर्कर 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर या तय अवधि तक किसी भी एग्रीगेटर से न जुड़े रहने पर सोशल सिक्योरिटी योजनाओं के लाभ के लिए अयोग्य हो जाएगा.
यह अवधि एक एग्रीगेटर के मामले में 90 दिन और कई एग्रीगेटर्स के मामले में 120 दिन होगी.

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में मिलेगा प्रतिनिधित्व

ड्राफ्ट नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के पांच प्रतिनिधियों को नामित करेगी. यह नामांकन रोटेशन के आधार पर होगा और अलग-अलग श्रेणियों के गिग वर्कर्स को प्रतिनिधित्व मिलेगा.

गिग वर्कर्स के लिए अहम कदम

विशेषज्ञों के मुताबिक, ये ड्राफ्ट नियम लागू होने के बाद गिग वर्कर्स को लंबे समय से चली आ रही सामाजिक सुरक्षा की मांग में बड़ी राहत मिल सकती है. हालांकि, नियमों को अंतिम रूप दिए जाने से पहले सरकार इन पर सुझाव और आपत्तियां भी आमंत्रित कर सकती है.

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