शेख हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर भारत ने दी प्रतिक्रिया
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर पड़ोसी देश द्वारा भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध पर भारत सरकार ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है.

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर पड़ोसी देश द्वारा भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध पर भारत सरकार ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक, कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं से गुजरने वाला विषय है.
शेख हसीना को मृत्युदंड की सजा
मंत्रालय के अनुसार, भारत इस पूरे प्रकरण को कानून के दायरे में रखते हुए देख रहा है और बांग्लादेश के लोगों की शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ढाका की एक विशेष अदालत ने पिछले सप्ताह शेख हसीना को अनुपस्थिति में ही ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ का दोषी करार देते हुए मृत्युदंड सुनाया.
अदालत का यह फैसला 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कथित दमन और हिंसा से जुड़ा बताया गया है. आंदोलन भड़कने के बाद 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना अपने पद से हटने के तुरंत बाद भारत चली आई थीं, जहां वे फिलहाल मौजूद हैं.
हसीना के साथ उनके करीबी सहयोगी और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी यही सजा दी गई है. दोनों नेताओं के खिलाफ अदालत के फैसले के बाद बांग्लादेश सरकार ने भारत को औपचारिक पत्र भेजकर प्रत्यर्पण की मांग रखी, जिसके बाद यह मुद्दा दोनों देशों के बीच प्रमुख राजनयिक चर्चा का विषय बन गया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत को प्राप्त यह अनुरोध अब कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत परखा जा रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश से जुड़े हर घटनाक्रम पर लगातार और गहन निगरानी रखे हुए है. जायसवाल ने कहा कि हम बांग्लादेश के लोगों के कल्याण, वहां की स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध हैं. आवश्यक हुआ तो हम सभी पक्षों से संवाद जारी रखेंगे.
वहीं दूसरी ओर ढाका का दावा है कि भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूद प्रत्यर्पण संधि के अनुसार शेख हसीना और उनके सहयोगी को भारत द्वारा तुरंत सौंपा जाना चाहिए. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट है और संधि के प्रावधानों के तहत भारत को इस मांग का पालन करना चाहिए.
शेख हसीना का पक्ष
लेकिन हसीना का पक्ष एकदम अलग है. उनका कहना है कि जिस अदालत ने यह फैसला सुनाया, वह गैर-कानूनी न्यायाधिकरण है जिसे एक अंतरिम सरकार ने स्थापित किया है. हसीना के अनुसार, यह अंतरिम सरकार जनादेशहीन है और उसके द्वारा गठित न्यायपालिका का कोई लोकतांत्रिक आधार नहीं है. हसीना ने अपने समर्थकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश देते हुए कहा कि यह फैसला राजनैतिक प्रतिशोध का परिणाम है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि बांग्लादेश में फरवरी 2026 में राष्ट्रीय चुनाव होने हैं. इसी अवधि में अवामी लीग हसीना की पार्टी को चुनाव में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है. इससे देश में सत्ता संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ गई है.
भारत के लिए यह मामला सिर्फ विदेश नीति का विषय नहीं, बल्कि कानून, संधियों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है. आने वाले दिनों में भारत सरकार की प्रक्रिया और न्यायिक समीक्षा से यह तय होगा कि शेख हसीना भारत में रहेंगी या बांग्लादेश वापस भेजी जाएंगी.


