भारतीय मूल की प्रोफेसर निताशा कौल का OCI कार्ड रद्द, भारत विरोधी गतिविधियों पर केंद्र ने लिया एक्शन
ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय मूल की प्रोफेसर निताशा कौल का ओसीआई स्टेटस भारत सरकार ने रद्द कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला उनकी आलोचनात्मक सोच और आरएसएस-विरोधी विचारों के कारण लिया गया. पिछले साल उन्हें भारत में प्रवेश से भी रोका गया था. कौल ने इसे लोकतंत्र और मानवीय अधिकारों पर हमला बताया. वे वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर लेख भी लिखती हैं.

ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय मूल की प्रोफेसर निताशा कौल ने की ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) रद्द कर दी है. उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दी. अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह कदम उनके 'भारत विरोधी गतिविधियों' के आरोप में उठाया गया है. उन्होंने इस फैसले को "अंतरराष्ट्रीय दमन" और "राजनीतिक प्रतिशोध" करार दिया. कौल ने आरोप लगाया कि उन्हें भारत सरकार की अल्पसंख्यक विरोधी और लोकतंत्र-विरोधी नीतियों की आलोचना करने की वजह से दंडित किया जा रहा है.
बीते वर्ष भारत में प्रवेश से रोका गया था
निताशा कौल ने यह भी बताया कि यह विवाद पिछले साल फरवरी में शुरू हुआ था, जब उन्हें कर्नाटक सरकार द्वारा एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया था. लेकिन भारत पहुंचने पर उन्हें देश में प्रवेश से वंचित कर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने उनके आरएसएस विरोधी विचारों के चलते उन्हें भारत में घुसने से रोका. उनके अनुसार, यह भारत की संघीय प्रणाली और राज्य सरकार की स्वायत्तता का भी अपमान है.
परिवार से अलग करने की सज़ा
अपनी एक और पोस्ट में कौल ने कहा, "भारत सरकार को यह बताना चाहिए कि आखिर लोकतंत्र की जननी ने मुझे मेरी अपनी मां से मिलने से क्यों रोका?" उन्होंने यह सवाल उठाते हुए कहा कि यह असहमति के लिए सम्मान की कमी और सत्ता के प्रति असुरक्षा का प्रतीक है. उन्होंने इसे मानवीय रिश्तों पर राजनीतिक नियंत्रण थोपने का उदाहरण बताया और कहा कि यह प्रवासी भारतीयों के अधिकारों का उल्लंघन है.
देश की संप्रभुता पर हमला
भारत सरकार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि प्रोफेसर कौल ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों और सोशल मीडिया पर बार-बार भारत की संप्रभुता और अखंडता पर सवाल उठाए हैं. गौरतलब है कि कौल, जो एक कश्मीरी पंडित हैं, ने 2019 में अमेरिकी कांग्रेस की विदेश मामलों की समिति के सामने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर भारत के खिलाफ गवाही दी थी. यही उनके खिलाफ कार्रवाई की मुख्य वजह बताई जा रही है.
कौन हैं निताशा कौल?
निताशा कौल लंदन के वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय में राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की प्रोफेसर हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने यूके के हल विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और दर्शन में संयुक्त पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. 2002 से 2007 तक वे ब्रिस्टल बिजनेस स्कूल में सहायक प्रोफेसर रहीं. 2010 में उन्होंने भूटान के रॉयल थिम्पू कॉलेज में रचनात्मक लेखन में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया.
लेखन और सामाजिक सक्रियता
प्रोफेसर कौल एक चर्चित लेखिका और कवयित्री भी हैं. उनकी पहली किताब 'इमेजिनिंग इकोनॉमिक्स अदरवाइज़: एनकाउंटर्स विद आइडेंटिटी/डिफरेंस' 2007 में प्रकाशित हुई थी. इसके अतिरिक्त उन्होंने 'क्या आप कश्मीरी महिलाओं को बोलते हुए सुन सकते हैं?' नामक पुस्तक का सह-संपादन भी किया है, जो महिलाओं के प्रतिरोध और लचीलेपन पर केंद्रित है. वे लंबे समय से सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों की आलोचना करती रही हैं, जिसे उनके खिलाफ कार्रवाई का कारण माना जा रहा है.


