पंजाब धमाकों के पीछे ISI का बड़ा खेल? खुफिया रिपोर्ट की जांच में चौंकाने वाला खुलासा

पंजाब के जालंधर और अमृतसर में हुए धमाकों के बाद खुफिया एजेंसियों ने इसे एक बड़ी साजिश से जोड़कर देखा है. इस घटना का ISI कनेक्शन और गैंगस्टर नेटवर्क की भूमिका की आशंका की जांच की जा रही है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: पंजाब में मंगलवार रात जालंधर और अमृतसर में हुए दो तेज धमाकों ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर ला दिया है. ये धमाके सीमा सुरक्षा बल (BSF) के मुख्यालय के पास हुए, जिसने सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. शुरुआती जांच में इन विस्फोटों को संदिग्ध इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से जुड़ा माना जा रहा है. खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ये घटनाएं किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती हैं.

खुफिया सूत्रों के अनुसार, यह घटनाएं ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की पहली बरसी से ठीक पहले हुई हैं, जिससे इनका संबंध ISI से जोड़ा जा रहा है. पिछले साल ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस और उससे जुड़े नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा था. इसके बाद से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI लगातार बड़े हमले की कोशिश कर रही है. ऐसे में अब इन घटनाओं को ISI की प्रतिक्रिया माना जा रहा है.

एक संगठित पैटर्न का हिस्सा

एजेंसियों का कहना है कि जालंधर और अमृतसर में हुए धमाके अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत किए गए हैं. इन हमलों का मकसद सिर्फ नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों को चुनौती देना और सीमावर्ती इलाकों में डर का माहौल बनाना भी हो सकता है. 

सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ISI अब सीधे आतंकियों को भेजने के बजाय एक नई रणनीति अपना रही है. इसे “हाइब्रिड वॉरफेयर” कहा जा रहा है. इसमें स्थानीय गैंगस्टरों और छोटे अपराधियों का इस्तेमाल कर हमले करवाए जाते हैं. इसके अलावा ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की तस्करी भी की जाती है, जिससे इन गतिविधियों को फंडिंग मिलती है.

गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल

खुफिया रिपोर्ट्स में एक पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी का नाम सामने आ रहा है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि वह ISI के इशारों पर काम करता है और विदेश में बैठकर अपने नेटवर्क को संचालित करता है. भट्टी पर आरोप है कि वह एन्क्रिप्टेड ऐप्स और सोशल मीडिया के जरिए अपने साथियों को निर्देश देता है और पंजाब के युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश करता है.

जांच एजेंसियों का मानना है कि अब आतंकवाद और अपराध के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है. गैंगस्टर, ड्रग्स तस्कर और आतंकी नेटवर्क मिलकर एक ऐसा तंत्र बना रहे हैं, जो खुद ही अपने लिए संसाधन जुटाता है.
इस मॉडल को “टेरर-क्राइम इकोसिस्टम” कहा जा रहा है, जहां अपराध और आतंकवाद एक-दूसरे को मजबूत करते हैं.

सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कोशिश

इन धमाकों का एक उद्देश्य सुरक्षा बलों के मनोबल को कमजोर करना भी हो सकता है. साथ ही, आम जनता में डर फैलाना और मीडिया का ध्यान खींचना भी इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं के जरिए पुराने उग्रवाद की यादें ताजा करने की कोशिश भी की जा रही है, ताकि राज्य में अस्थिरता पैदा की जा सके.

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