5 साल में खत्म हो जाएंगी IT और BPO नौकरियां? तकनीकी अरबपति विनोद खोसला ने दी चेतावनी

टेक निवेशक विनोद खोसला ने कहा कि AI के कारण अगले पांच वर्षों में IT और BPO सेवाएं लगभग खत्म हो सकती हैं. उन्होंने चेताया कि 15 साल में अधिकांश विशेषज्ञ नौकरियां बदल जाएंगी, हालांकि AI स्वास्थ्य और शिक्षा को सस्ता बना सकता है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन कुछ बदलाव इतने बड़े हो सकते हैं कि पूरी अर्थव्यवस्था की दिशा ही बदल दें. सिलिकॉन वैली के जाने-माने निवेशक और एंटरप्रेन्योर विनोद खोसला का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले वर्षों में नौकरी और व्यापार की परिभाषा बदल देगी. एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि अगले पांच साल में आईटी सेवाएं और बीपीओ जैसे क्षेत्र लगभग खत्म हो सकते हैं.

आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद खोसला का सपना अपना स्टार्टअप शुरू करना था. अमेरिका पहुंचकर उन्होंने अपनी पहली कंपनी बनाई, जो सफल रही. इसके बाद उन्होंने सन माइक्रोसिस्टम्स की सह-स्थापना की, जिसने उन्हें तकनीकी दुनिया में पहचान दिलाई. बाद में उन्होंने अपनी वेंचर कैपिटल फर्म के जरिए नए एंटरप्रेन्योर्स को सहयोग देना शुरू किया. उनका मानना है कि इनोवेशन ही असली ताकत है.

एआई से बदलती दुनिया

खोसला के अनुसार, आने वाले 10 से 15 वर्षों में विशेषज्ञता आधारित अधिकतर काम एआई संभाल लेगा. उनका कहना है कि एआई अकाउंटिंग, चिकित्सा, कानूनी सलाह और यहां तक कि चिप डिजाइन जैसे काम इंसानों से बेहतर कर सकेगा. पहले यह मानव विशेषज्ञों के सहायक के रूप में काम करेगा, लेकिन धीरे-धीरे मुख्य भूमिका में आ जाएगा. वे यह भी मानते हैं कि रोबोटिक्स अगली बड़ी क्रांति होगी. रसोई से लेकर खेतों और फैक्ट्रियों तक का काम मशीनें करेंगी. इससे श्रम लागत काफी कम हो जाएगी और 2035 तक वैश्विक स्तर पर महंगाई में गिरावट आ सकती है.

नौकरियों पर असर और नए अवसर

खोसला साफ कहते हैं कि आज के युवाओं को भविष्य के रोजगार बाजार के लिए अलग तरह से तैयार होना होगा. उनका अनुमान है कि पारंपरिक नौकरियां कम होती जाएंगी. हालांकि वे यह भी जोड़ते हैं कि एआई स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सेवाओं को सस्ता और सुलभ बना सकता है. 

भारत जैसे देश में एआई के जरिए हर व्यक्ति को डॉक्टर, शिक्षक और कानूनी सलाहकार उपलब्ध कराना संभव हो सकता है. उनका सुझाव है कि भारत को आईटी सेवाओं पर निर्भर रहने के बजाय एआई आधारित उत्पाद और सेवाएं विकसित कर दुनिया को निर्यात करना चाहिए. उनका मानना है कि अगले दशक में भारत इस क्षेत्र में बड़ी ताकत बन सकता है.

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और भारत की भूमिका

खोसला ने चेतावनी दी कि यदि एआई तकनीक केवल अमेरिका और चीन तक सीमित रह गई तो यह दुनिया के लिए ठीक नहीं होगा. उनका कहना है कि भारत के पास प्रतिभा की कमी नहीं है और उसे अपने स्वतंत्र एआई मॉडल विकसित करने चाहिए. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों में मदद मिलेगी.

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