BJP उपाध्यक्ष अरविंद खन्ना ने छोड़ा पार्टी का दामन, विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले लिया बड़ा फैसला
पंजाब में 2027 चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है. पूर्व भाजपा नेता अरविंद खन्ना अकाली दल में शामिल हो गए. वहीं, आप विधायक ने भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत संपर्क करने का आरोप लगाया, जिसे भाजपा ने खारिज किया.

पंजाब: विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की सियासत में हलचल तेज होती दिख रही है. संगरूर से जुड़ी एक बड़ी राजनीतिक खबर ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है. भारतीय जनता पार्टी की पंजाब इकाई के उपाध्यक्ष रहे अरविंद खन्ना ने रविवार को शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया. यह कदम ऐसे समय पर उठा है जब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं और मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में है.
रविवार को शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल स्वयं संगरूर स्थित खन्ना के निवास पहुंचे. वहीं पर औपचारिक रूप से उन्हें पार्टी में शामिल कराया गया. बादल ने इस मौके पर खुशी जताते हुए कहा कि खन्ना की वापसी से पार्टी को मजबूती मिलेगी. साथ ही उन्हें संगरूर विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी भी नियुक्त किया गया.
अरविंद खन्ना ने की घर वापसी
अरविंद खन्ना का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. वह पहले कांग्रेस से जुड़े रहे और 2002 में संगरूर से तथा 2012 में धुरी सीट से विधायक चुने गए. बाद में जनवरी 2022 में उन्होंने भाजपा जॉइन की थी. हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में उन्हें जीत हासिल नहीं हो सकी.
पार्टी में दोबारा शामिल होने के बाद खन्ना ने एक सभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अकाली दल से की थी और अब दोबारा उसी दल में लौटना उनके लिए घर वापसी जैसा है. उन्होंने भरोसा जताया कि वह क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने के लिए पूरी मेहनत करेंगे.
‘ऑपरेशन लोटस’ को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
इसी बीच संगरूर की राजनीति में एक और बयान ने हलचल पैदा की. आम आदमी पार्टी की विधायक नरिंदर कौर भरज ने दावा किया कि भाजपा की ओर से उन्हें टिकट का प्रस्ताव दिया गया था. उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का नाम लेते हुए कहा कि उनसे संपर्क किया गया और बंद कमरे में बैठक का प्रस्ताव भी रखा गया.
हालांकि, सैनी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह न तो विधायक को जानते हैं और न ही उनके क्षेत्र के बारे में कोई जानकारी रखते हैं. जब उनसे बैठक के दावे पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने उल्टा सवाल करते हुए पूछा कि ऐसा कब हुआ.


