न्यायमूर्ति सूर्यकांत होंगे भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश, इस पद पर पहुंचने वाले हरियाणा के पहले जज, सीजेआई ने भेजा प्रस्ताव
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में न्यायमूर्ति सूर्यकांत का नाम केंद्र को भेजा है. मंजूरी के बाद वे भारत के 53वें सीजेआई बनेंगे और 9 फरवरी 2027 तक पद पर रहेंगे. हरियाणा के निवासी सूर्यकांत अपने संतुलित और संवेदनशील न्यायिक दृष्टिकोण के लिए प्रसिद्ध हैं.

नई दिल्लीः भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति बी. आर. गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत का नाम केंद्र सरकार को भेजा है. सीजेआई गवई का कार्यकाल 23 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है. परंपरा के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश को ही नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है.
कितने महीनों का होगा कार्यकाल?
केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बनेंगे और उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा, यानी लगभग 14 महीने का कार्यकाल. अगर सब कुछ तय प्रक्रिया के अनुसार होता है, तो न्यायमूर्ति सूर्यकांत हरियाणा से आने वाले पहले व्यक्ति होंगे जो देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर आसीन होंगे.
कौन हैं न्यायमूर्ति सूर्यकांत
न्यायमूर्ति सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था. उनका परिवार कानूनी पृष्ठभूमि से नहीं था, उनके पिता एक साधारण सरकारी शिक्षक थे. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से प्राप्त की और उसके बाद महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक से 1984 में कानून की डिग्री (LLB) हासिल की.
वकालत से न्यायपालिका तक का सफर
कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने करियर की शुरुआत हिसार जिला न्यायालय से की. कुछ वर्षों तक वहीं प्रैक्टिस करने के बाद वे पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ में स्थानांतरित हो गए. वहां अपनी कानूनी दक्षता और ईमानदार कार्यशैली के लिए वे शीघ्र ही प्रसिद्ध हो गए. साल 2000 में मात्र 38 वर्ष की उम्र में उन्हें हरियाणा का सबसे युवा महाधिवक्ता (Advocate General) नियुक्त किया गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी. इसके चार साल बाद 2004 में उन्हें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया.
शैक्षणिक और न्यायिक योगदान
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पेशेवर जीवन के साथ अपनी शिक्षा जारी रखी. उन्होंने 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (Post-Graduation) की डिग्री प्राप्त की. उनका कार्यकाल न्यायपालिका में संतुलन, संवेदनशीलता और व्यवहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है. उन्होंने 14 वर्षों तक पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में सेवा दी और फिर अक्टूबर 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया.
सर्वोच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण निर्णय
24 मई 2019 को न्यायमूर्ति सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया. उनके न्यायिक करियर में कई महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं- अनुच्छेद 370 को रद्द करने से जुड़ा ऐतिहासिक फैसला (2023) में वे पांच-सदस्यीय संविधान पीठ का हिस्सा थे. राजद्रोह कानून (Sedition Law) पर 2022 में दिए गए निर्देशों में भी वे शामिल थे, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस कानून के उपयोग से परहेज करने को कहा था और सभी लंबित मामलों को स्थगित किया था.
आगे क्या?
यदि केंद्र सरकार द्वारा सिफारिश को मंजूरी दी जाती है, तो न्यायमूर्ति सूर्यकांत न्यायिक मर्यादा, सरलता और निष्पक्षता के साथ भारत के सर्वोच्च न्यायालय का नेतृत्व करेंगे. उनके नेतृत्व में न्यायपालिका से पारदर्शिता और न्यायिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है.


