केरल चुनाव में NDA का बड़ा प्लान, 140 सीटें अकेले...कोई CM कैंडिडेट नहीं, मोदी ही होंगे चेहरा!
केरल विधानसभा चुनाव को लेकर NDA अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है. इस बार BJP और उसके सहयोगी दल राज्य की सभी 140 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं.

नई दिल्ली: केरल विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) ने बड़ा दांव खेला है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दल राज्य की सभी 140 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं. इस बार एनडीए किसी मुख्यमंत्री चेहरे के बिना मैदान में उतरेगा.
पिछले चुनाव में पार्टी ने मेट्रो मैन ई श्रीधरन को सीएम उम्मीदवार बनाया था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. एनडीए का पूरा फोकस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम, उनकी सरकार के काम और विकास पर रहेगा.
प्रचार में कौन-कौन होंगे चेहरे?
चुनाव प्रचार के पोस्टरों और रैलियों में पीएम मोदी का चेहरा सबसे प्रमुख होगा. साथ ही केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर, 20-20 पार्टी के प्रमुख साबू एम जैकब और भारतीय जन धर्म सेना के नेता टी वेल्लापल्ली नटेसन भी प्रमुखता से दिखेंगे.
ये तीनों चेहरे एनडीए की एकजुटता और मजबूती का संदेश देंगे. सूत्रों के अनुसार, साबू जैकब और वेल्लापल्ली खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे. वे एनडीए उम्मीदवारों के लिए जोरदार प्रचार करेंगे और वोट जुटाने में मदद करेंगे.
सीट बंटवारे की योजना
एनडीए में बीजेपी के अलावा मुख्य सहयोगी 20-20 पार्टी और भारतीय जन धर्म सेना हैं. कुछ छोटे दल भी शामिल हैं. सीट बंटवारे पर चर्चा चल रही है. अनुमान है कि बीजेपी खुद करीब 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
20-20 पार्टी 10 से 15 सीटों पर और भारतीय जन धर्म सेना 25 से 30 सीटों पर उतरेगी. पिछली बार भारतीय जन धर्म सेना ने 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. इस बार एनडीए का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना और राज्य में मजबूत उपस्थिति बनाना है.
स्थानीय चुनावों से मिला जोश
बीजेपी और एनडीए को हाल के स्थानीय निकाय चुनावों से काफी उत्साह मिला है. तिरुवनंतपुरम में पार्टी ने पहली बार मेयर पद जीता. इससे पार्टी को लगता है कि वह राज्य में तीसरी बड़ी ताकत बन सकती है.
एनडीए का मानना है कि अगर विधानसभा त्रिशंकु बनी तो वह निर्णायक भूमिका निभा सकती है. विकास, रोजगार, बुनियादी ढांचा और केंद्र की योजनाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा.
एनडीए की चुनावी रणनीति
एनडीए की रणनीति साफ है-मोदी की लोकप्रियता और विकास के एजेंडे पर भरोसा. पार्टी का कहना है कि केरल में लोग अब बदलाव चाहते हैं. पिछले चुनावों में एनडीए को ज्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन इस बार पूरी ताकत झोंक दी गई है.
सभी 140 सीटों पर लड़ना एनडीए की गंभीरता और आत्मविश्वास दिखाता है. अब देखना होगा कि यह रणनीति कितनी कामयाब होती है और केरल की राजनीति में कितना बदलाव लाती है.


