'मैं अभागा सवर्ण हूं…' UGC रूल्स पर कुमार विश्वास की एंट्री, कविता के जरिए जताई नाराज़गी
यूजीसी रूल्स 2026 को लेकर चल रही बहस में अब कवि कुमार विश्वास भी कूद पड़े हैं. कविता की पंक्तियों के जरिए उन्होंने नियमों के विरोध में उठ रही आवाजों का समर्थन किया है, जिससे यह मुद्दा और गर्मा गया है.

यूजीसी विवाद: यूजीसी रूल्स 2026 को लेकर देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शुरू हुआ विवाद अब सियासी और सामाजिक बहस का रूप लेता जा रहा है. एक ओर जहां इन नियमों को समानता और समावेशन से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इन्हें लेकर विरोध की आवाजें भी तेज होती जा रही हैं.
इसी बीच मशहूर कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने भी यूजीसी रूल्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक कविता साझा कर उन लोगों के सुर में सुर मिलाया है, जो इन नियमों को वापस लेने या इनमें बदलाव की मांग कर रहे हैं.
यूजीसी रूल्स 2026 पर क्यों मचा है बवाल
देशभर में लागू किए गए यूजीसी के नए नियमों को लेकर एक वर्ग का मानना है कि इनमें कई अहम प्रावधान अस्पष्ट हैं. खासतौर पर झूठी शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर नियमों में किसी तरह की स्पष्टता न होने से विरोध बढ़ता जा रहा है. सोशल मीडिया से लेकर शैक्षणिक परिसरों तक इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ी हुई है.
कुमार विश्वास ने कविता के जरिए जताई राय
इस बहस के बीच कुमार विश्वास ने दिवंगत कवि रमेश रंजन मिश्र की कविता की पंक्तियां साझा करते हुए अपनी बात रखी. उन्होंने जो पंक्तियां पोस्ट कीं, वे इस प्रकार हैं:-
'चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ...'
इन पंक्तियों के साथ कुमार विश्वास ने पोस्ट में #UGC_RollBack हैशटैग का भी इस्तेमाल किया.
#UGC_RollBack के जरिए क्या कहना चाहते हैं कुमार विश्वास
कुमार विश्वास की इस पोस्ट को यूजीसी रूल्स के खिलाफ उठ रही आवाजों के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है. कविता के माध्यम से उन्होंने उस वर्ग की पीड़ा को सामने रखा है, जो इन नियमों को अपने खिलाफ मान रहा है और इन्हें एकतरफा करार दे रहा है.
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
कुमार विश्वास की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं.कई लोगों ने लिखा कि इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से उनके प्रति सम्मान और बढ़ गया है. वहीं कुछ यूजर्स ने उनके बयान पर सवाल उठाते हुए असहमति भी जताई. कई लोगों का कहना था कि उन्हें पहले से उम्मीद थी कि कुमार विश्वास इस मसले पर जरूर अपनी राय रखेंगे.
यूपी में क्यों ज्यादा तूल पकड़ रहा है मामला
यूजीसी रूल्स को लेकर उत्तर प्रदेश में विवाद और गहराता दिख रहा है. खासतौर पर राजनीतिक रूप से यह मुद्दा संवेदनशील होता जा रहा है. एक तरफ सवर्ण समाज में नाराजगी की चर्चा है, वहीं दूसरी ओर नियमों में बदलाव की स्थिति में ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग की प्रतिक्रिया को लेकर भी आशंकाएं जताई जा रही हैं.
पीसीएस अधिकारी के इस्तीफे से बढ़ी राजनीतिक हलचल
इस विवाद ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब यूपी के बरेली में तैनात सिटी मजिस्ट्रेट और पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. उनका इस्तीफा यूजीसी रूल्स के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे सत्ताधारी दल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं.
झूठी शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
विरोध करने वाले वर्ग का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोई शिकायत झूठी पाई जाती है, तो उस पर क्या कार्रवाई होगी. नियमों में इस तरह के प्रावधान की कमी को लेकर आशंका जताई जा रही है और इसे एक वर्ग विशेष के खिलाफ बताया जा रहा है.
क्या यूजीसी रूल्स में होगा बदलाव?
लगातार बढ़ते विरोध, सोशल मीडिया पर ट्रेंड और प्रशासनिक स्तर पर इस्तीफों के बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यूजीसी रूल्स 2026 में कोई संशोधन किया जाएगा या सरकार इन नियमों को मौजूदा स्वरूप में ही आगे बढ़ाएगी.


