127 वर्षों बाद स्वदेश वापस लाए गए भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष...PM मोदी ने किया प्रदर्शनी का भव्य उद्घाटन
PM मोदी ने नई दिल्ली में भगवान बुद्ध से जुड़े पिपरहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसमें 127 वर्षों बाद लौटाए गए दुर्लभ रत्न अवशेष प्रदर्शित किए गए हैं. इसी अवसर पर प्रधानमंत्री ने समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले और वीरांगना रानी वेलु नचियार को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की.

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली के राय पीठोरा सांस्कृतिक परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी “द लाइट एंड द लोटस: रिलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” का उद्घाटन किया. यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध से जुड़े पिपरहवा के पवित्र अवशेषों को समर्पित है और इसे ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि 127 वर्षों बाद इन अमूल्य रत्न अवशेषों का पुनः एकत्रीकरण हुआ है.
127 वर्षों बाद पिपरहवा अवशेषों का पुनर्मिलन
Speaking during the inauguration of the Grand International Exposition of Sacred Piprahwa Relics related to Bhagwan Buddha.
https://t.co/8irFbkh8pn— Narendra Modi (@narendramodi) January 3, 2026
विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदर्शनी से जुड़ी तस्वीरें साझा करते हुए लोगों से इसे देखने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि यह आयोजन भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और समानता के संदेश को व्यापक रूप से फैलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. साथ ही यह प्रयास युवाओं को भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा. प्रधानमंत्री ने पवित्र अवशेषों की स्वदेश वापसी में योगदान देने वाले सभी लोगों की सराहना की.
इतिहासकारों और बौद्ध अनुयायियों में उत्साह
इस भव्य प्रदर्शनी ने देश-विदेश के इतिहासकारों, संस्कृति प्रेमियों और बौद्ध धर्म के अनुयायियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है. यह आयोजन भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह अपनी प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और वैश्विक स्तर पर उनके महत्व को उजागर करने के लिए निरंतर प्रयासरत है.
सावित्रीबाई फुले को श्रद्धांजलि
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने शिक्षा और सेवा के माध्यम से समाज में बदलाव लाने में सावित्रीबाई फुले की भूमिका को याद किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने समानता, न्याय और करुणा के मूल्यों को अपनाते हुए शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम माना.
भारतीय नारी शिक्षा की अग्रदूत
सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षिका के रूप में जाना जाता है. उन्होंने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर 1848 में पुणे के भिड़े वाड़ा में बालिकाओं के लिए पहला स्कूल स्थापित किया. उन्होंने जाति और लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया और सामाजिक सुधार आंदोलन में अहम योगदान दिया.
रानी वेलु नचियार को नमन
प्रधानमंत्री मोदी ने वीरांगना रानी वेलु नचियार की जयंती पर भी उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि रानी वेलु नचियार ने औपनिवेशिक अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष कर यह स्पष्ट किया कि भारत पर शासन करने का अधिकार केवल भारतीयों का है. उनके साहस, रणनीतिक कौशल और नेतृत्व को सदैव याद किया जाएगा.
ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देने वाली पहली महिला शासक
रानी वेलु नचियार ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ हथियार उठाने वाली पहली भारतीय महिला शासक थीं. पति की मृत्यु के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और हैदर अली के संरक्षण में रहकर सेना का गठन किया. 1780 में अपने सहयोगियों की सहायता से उन्होंने अंग्रेजों को पराजित कर ऐतिहासिक विजय प्राप्त की, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणादायक गाथा मानी जाती है.


