महाराष्ट्र में 'लव जिहाद' पर लगाम! जबरन धर्म बदलवाया तो 7-10 साल की सलाखें... 60 दिन पहले सूचना अनिवार्य

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट कहा है कि यह कानून किसी खास धर्म के खिलाफ नहीं बनाया गया है. इसका एकमात्र उद्देश्य है- धोखे, लालच या प्रलोभन देकर जबरन या छल से होने वाले धर्म परिवर्तन को पूरी तरह रोकना. सच्ची स्वतंत्रता और विश्वास की रक्षा ही इसका मकसद है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

महाराष्ट्र विधानसभा ने सोमवार रात महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है. यह विधेयक जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह के बहाने होने वाले अवैध धर्मांतरण पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है. राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए कमजोर वर्गों, महिलाओं और नाबालिगों को सुरक्षा प्रदान करने वाला है.

इस विधेयक के पारित होने से महाराष्ट्र उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जहां ऐसे सख्त एंटी-कन्वर्जन कानून लागू हैं. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, ओडिशा, कर्नाटक और झारखंड जैसे राज्यों में पहले से ही समान प्रावधान मौजूद हैं. महाराष्ट्र का यह कानून कुछ मामलों में और भी कठोर माना जा रहा है, जिसमें विवाह से जुड़े धर्मांतरण पर विशेष फोकस है.

जबरन और धोखाधड़ी से धर्मांतरण पर सख्त सजा

विधेयक में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि जबरदस्ती, धोखे या लालच देकर धर्म बदलवाने वाले व्यक्ति को सात साल तक की कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है. यदि यह अपराध नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य के साथ किया जाता है, तो सजा सात साल की कैद और पांच लाख रुपये का जुर्माना होगी. सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में भी सात साल की कैद और पांच लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित है. बार-बार अपराध करने पर सजा 10 साल तक की कैद और पांच लाख रुपये का जुर्माना हो सकती है.

विवाह के बहाने धर्मांतरण पर विशेष प्रावधान

विधेयक के अनुसार, विवाह के माध्यम से गैरकानूनी धर्मांतरण कराने वालों को सात साल की कैद और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. यदि ऐसे विवाह से बच्चा जन्म लेता है, तो बच्चे का धर्म उस धर्म को माना जाएगा जिसे उसकी मां शादी से पहले मानती थी.

धर्म परिवर्तन के लिए 60 दिन पहले सूचना अनिवार्य

धर्म बदलने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को अब 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी. इस प्रावधान पर विपक्ष ने सवाल उठाए, जिसके जवाब में गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा, इस प्रावधान का मकसद केवल यह जांचना है कि धर्मांतरण मर्जी से हो रहा है, न कि धोखाधड़ी, बल या प्रलोभन के माध्यम से. इस प्रक्रिया का मकसद व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने के बजाय पारदर्शिता और सुरक्षा देना है.

कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं, मुख्यमंत्री फडणवीस

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि संबंधित कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ लक्षित नहीं है, बल्कि इसका मकसद केवल धोखाधड़ी या प्रलोभन के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है. वहीं, गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा कि प्रस्तावित कानून का मकसद संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए धोखाधड़ी, जबरदस्ती या प्रलोभन के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण पर अंकुश लगाना है.

विधेयक का उद्देश्य और प्रभाव

  • जबरन धर्मांतरण को रोकना

  • महिलाओं और कमजोर वर्गों को सुरक्षा देना 

  • धोखाधड़ी या लालच से धर्मांतरण की घटनाओं पर रोक लगाना

यह विधेयक मार्च की शुरुआत में कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में पेश किया गया था और अब पारित हो चुका है. राज्य के मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने पहले कहा था कि महाराष्ट्र का यह कानून मध्य प्रदेश और गुजरात के कानूनों से भी अधिक सख्त होगा, जिसमें ऐसे अपराध गैर-जमानती होंगे.

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