मुंबई मेयर पोस्ट को लेकर शिवसेना और भाजपा के बीच सियासी जंग तेज, उद्धव सेना कर सकती है रणनीतिक चाल
मुंबई की सत्ता की जंग में बड़ा उलटफेर, BJP और एकनाथ शिंदे की सेना ने मिलकर BMC पर कब्जा जमाया. शुक्रवार को आए रोमांचक नतीजों में बीजेपी ने 89 और शिंदे गुट ने 29 सीटें जीतीं, जबकि उद्धव ठाकरे की सेना को 65 सीटें मिलीं.

मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में महायुक्ति की जीत के बाद से मेयर पद को लेकर सियासी घमासान जारी है. भाजपा और एकनाथ शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच सत्ता के इस अहम पद पर दावा झगड़े को जन्म दे रहा है. सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे नेतृत्व वाली शिवसेना अब शिंदे की पकड़ को कमजोर करने के लिए रणनीतिक कदम पर विचार कर रही है.
सूत्रों के अनुसार, उद्धव सेना ने मांग की है कि मेयर पद का पहला साल उनकी पार्टी को मिले. मुंबई में भाजपा और शिवसेना की संयुक्त ताकत 118 सीटों की है, जो बहुमत के निशान 114 से चार अधिक है.
उद्धव शिवसेना की रणनीति क्या हो सकती है?
सूत्रों का कहना है कि UBT गुट BMC हाउस में मेयर चुनाव के दौरान अपने सभी कॉरपोरेटरों का वॉकआउट कर सकता है. इससे मतदान के समय हाउस की प्रभावी ताकत कम हो जाएगी और भाजपा को अकेले बहुमत बनाने में आसानी होगी.
अगर यह रणनीति अपनाई जाती है, तो एकनाथ शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना महायुक्ति में होने के बावजूद अपनी सौदेबाजी की ताकत खो सकती है. हालांकि UBT ने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि विकल्प पर सक्रिय विचार चल रहा है.
संजय राउत ने BJP मेयर पर जताई चिंता
इसी बीच, शिवसेना नेता संजय राउत ने भाजपा मेयर के चुनाव को लेकर तीखी टिप्पणियां की हैं. उन्होंने कहा कि जिस दिन BJP का मेयर या किसी गद्दार का मेयर चुना जाएगा, मुंबई गम में डूब जाएगी. समझे? जैसे मोरारजी देसाई के आदेश पर गोलीबारी हुई थी और 106 लोगों की जान गई थी, उसी तरह BJP मेयर के चुने जाने का दिन काला दिन होगा.
राउत ने अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मैंने कभी कहा कि मेयर नहीं चुना जाएगा? मैंने कभी ऐसा नहीं कहा. हम विकल्प तलाश रहे हैं. पहले देखिए कि आपने क्लास 10 में गणित में कितने मार्क्स पाए, फिर कैलकुलेशन की बातें करें. भाजपा अपने मेयर की बात करती है, एकनाथ शिंदे के पास 30 कॉरपोरेटर भी नहीं हैं, फिर भी मेयर की बात करता है.
उद्धव गुट ने दिखाया दबदबा
संजय राउत ने आगे कहा कि जो मेयर चुनना चाहते हैं, उन्हें चुनने दें. हम अभी भी हैं. बाघ अभी जीवित है. शिवसेना और हमारे सहयोगियों के पास अब भी उन्हें चुनौती देने की ताकत है. कभी-कभी थोड़ा मस्ती भी जरूरी होती है, और हमारे गुट में वही हो रहा है.


