मुंबई महापौर पद को लेकर महायुति में खींचतान, एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने पहले वर्ष के लिए ठोकी दावेदारी

बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद महापौर पद को लेकर महायुति में चर्चा तेज है. शिवसेना ने बाल ठाकरे की शताब्दी का हवाला देते हुए पहले वर्ष के लिए महापौर पद की मांग रखी है, जबकि भाजपा ने अपने पार्षदों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं.

Shraddha Mishra

मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों के नतीजे आने के बाद अब मुंबई के महापौर पद को लेकर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर चर्चा तेज हो गई है. इसी बीच एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने स्पष्ट रूप से मांग रखी है कि महापौर का पद कम से कम पहले वर्ष के लिए पार्टी को दिया जाए. सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर गठबंधन सहयोगियों के बीच लगातार बातचीत चल रही है.

बीएमसी की कुल सदस्य संख्या 227 है, जिसमें बहुमत के लिए 114 पार्षदों का समर्थन जरूरी होता है. वर्तमान स्थिति में भाजपा और शिवसेना के पास मिलकर 118 पार्षद हैं, जो बहुमत के आंकड़े से चार अधिक हैं. यदि अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के तीन पार्षदों का समर्थन भी जुड़ता है, तो गठबंधन की ताकत बढ़कर 121 हो जाती है. इस मजबूत संख्यात्मक स्थिति के कारण महापौर चुनाव में महायुति को बढ़त हासिल मानी जा रही है.

शिवसेना की मांग के पीछे भावनात्मक तर्क

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना ने अपनी मांग के समर्थन में पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी का हवाला दिया है. 23 जनवरी को बालासाहेब ठाकरे की 100वीं जयंती है और पार्टी का मानना है कि पहले वर्ष के लिए शिवसेना का महापौर होना उन्हें श्रद्धांजलि देने का एक प्रतीकात्मक और सम्मानजनक तरीका होगा. शिवसेना नेताओं का कहना है कि यह कदम न केवल पार्टी की विरासत से जुड़ा है, बल्कि गठबंधन की भावना के भी अनुरूप है.

इससे पहले शिवसेना ने महापौर पद के कार्यकाल को बराबरी से बांटने की मांग रखी थी. पार्टी चाहती थी कि पांच साल का कार्यकाल भाजपा और शिवसेना के बीच ढाई-ढाई साल के लिए विभाजित किया जाए. हालांकि, जब पार्टी को यह संकेत मिला कि इस प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने की संभावना कम है, तो उसने अपनी रणनीति में बदलाव किया. इसके बाद शिवसेना ने अपनी मांग को केवल पहले वर्ष तक सीमित कर दिया.

सूत्रों का कहना है कि शिवसेना ने बातचीत के दौरान भाजपा को यह भी याद दिलाया है कि केंद्र और महाराष्ट्र दोनों स्तरों पर राजनीतिक रूप से कठिन समय में उसने भाजपा का साथ दिया था. बाल ठाकरे की शताब्दी के मौके पर शिवसेना का प्रस्ताव है कि पहले साल महापौर पद शिवसेना के पास रहे और उसके बाद शेष चार वर्षों के लिए यह जिम्मेदारी भाजपा संभाल सकती है.

भाजपा ने पार्षदों को दिए सख्त निर्देश

इधर, महापौर चुनाव को ध्यान में रखते हुए मुंबई भाजपा ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. पार्टी ने सभी पार्षदों से कहा है कि वे अगले 10 दिनों तक मुंबई से बाहर न जाएं. यदि किसी आपात स्थिति में यात्रा जरूरी हो, तो पहले वरिष्ठ नेताओं को इसकी जानकारी देना अनिवार्य किया गया है.

सूत्रों के अनुसार, महापौर चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने में लगभग आठ से दस दिन लग सकते हैं. ऐसे में भाजपा किसी भी तरह की अनुपस्थिति या असमंजस से बचना चाहती है. पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मतदान के दौरान उसके सभी पार्षद मौजूद रहें और गठबंधन की रणनीति पर कोई असर न पड़े.

मजबूत स्थिति में गठबंधन

भाजपा के पास फिलहाल 89 पार्षद हैं, जबकि शिवसेना के 29 पार्षद हैं. इस तरह दोनों दलों का संयुक्त आंकड़ा बहुमत से ऊपर है. ऐसे में महापौर पद किसके हिस्से आएगा, इस पर अंतिम फैसला बातचीत के बाद ही होगा, लेकिन फिलहाल शिवसेना ने पहले वर्ष के लिए अपनी दावेदारी मजबूती से सामने रख दी है.

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