मेरिट सर्वोपरि, जनरल कैटगरी सीटों पर भी SC/ST/OBC का हक! सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की डबल बेनिफिट की दलील
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार बिना किसी रियायत के सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे शॉर्टलिस्टिंग के चरण में ही ओपन कैटेगरी में शामिल किया जाना चाहिए.

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें भर्ती प्रक्रिया के दौरान ओपन कैटेगरी में चयन को केवल योग्यता से जोड़ने पर जोर दिया गया था. अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी प्रकार की छूट या रियायत लिए सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे प्रारंभिक शॉर्टलिस्टिंग से ही ओपन कैटेगरी में माना जाना चाहिए. ऐसा न करना समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा.
यह मामला राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II पदों पर की गई भर्ती से जुड़ा था. चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के बाद टाइपिंग टेस्ट रखा गया था और हर श्रेणी से सीमित संख्या में उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए बुलाया जाना था. परिणाम आने के बाद यह सामने आया कि कुछ आरक्षित श्रेणियों की कट-ऑफ सामान्य श्रेणी से अधिक थी, जिससे ऐसे उम्मीदवार बाहर हो गए जिन्होंने जनरल कट-ऑफ से बेहतर प्रदर्शन किया था.
ओपन कैटेगरी कोई आरक्षित कोटा नहीं
डबल बेनिफिट और एस्टॉपल पर टिप्पणी
अदालत ने यह तर्क अस्वीकार कर दिया कि ऐसे उम्मीदवारों को ओपन कैटेगरी में शामिल करने से उन्हें दोहरा लाभ मिलेगा. न्यायालय के अनुसार, जब चयन प्रक्रिया में स्पष्ट असमानता हो, तब एस्टॉपल जैसे सिद्धांत लागू नहीं किए जा सकते.
उम्मीदवारों को अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता
इंद्रा साहनी और आर.के. सभरवाल जैसे पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि उच्च मेरिट प्राप्त करने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को समान अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता. यह फैसला भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, योग्यता और संवैधानिक समानता को मजबूत करता है.


