ओबामा से यूरोपीय संघ तक...गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथियों में झलकी भारत की विदेश नीति, मजबूत हो रहे अंतरराष्ट्रीय रिश्ते

2015 से 2026 तक भारत के गणतंत्र दिवस समारोहों में आमंत्रित मुख्य अतिथियों ने देश की बदलती विदेश नीति और वैश्विक प्राथमिकताओं को दर्शाया है. अमेरिका, फ्रांस, आसियान, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोपीय संघ के नेताओं की उपस्थिति ने रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, व्यापार, तकनीक और बहुपक्षीय कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से स्थापित किया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : साल 2015 भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. यह पहला अवसर था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शिरकत की. ओबामा की मौजूदगी ने भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई दी और रक्षा, व्यापार तथा रणनीतिक सहयोग को मजबूती मिली. संयुक्त सैन्य झांकियों और उच्च स्तरीय वार्ताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि दोनों देश वैश्विक मंच पर एक-दूसरे के अहम साझेदार बन चुके हैं. 

2016–2017: फ्रांस और खाड़ी देशों से रिश्तों को मजबूती

आपको बता दें कि 2016 में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के आगमन ने भारत-फ्रांस संबंधों को और गहरा किया. यह फ्रांस के किसी नेता का पांचवां गणतंत्र दिवस दौरा था, जो राफेल लड़ाकू विमानों जैसे बड़े रक्षा समझौतों के साथ जुड़ा रहा. यह यात्रा द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर आधुनिक आतंकवाद विरोधी सहयोग तक साझा इतिहास को दर्शाती है.

2017 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मुख्य अतिथि बने
इसके बाद 2017 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान मुख्य अतिथि बने. इस दौरे ने भारत और खाड़ी देशों के बीच ऊर्जा, निवेश और प्रवासी भारतीयों से जुड़े रिश्तों को नई दिशा दी.

2018: आसियान देशों के साथ सहभागिता
साल 2018 में भारत ने एक अनूठा प्रयोग करते हुए दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को एक साथ आमंत्रित किया. यह भारत की ‘लुक ईस्ट नीति’ के ‘एक्ट ईस्ट नीति’ में बदलने के 25 वर्ष पूरे होने का प्रतीक था. इस अवसर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया गया. आसियान देशों की सैन्य टुकड़ियों की परेड में भागीदारी ने क्षेत्रीय सहयोग और सामरिक साझेदारी का सशक्त संदेश दिया.

2019–2020: वैश्विक दक्षिण और ब्रिक्स पर फोकस
2019 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा मुख्य अतिथि बने. यह दौरा उपनिवेशवाद विरोधी साझा संघर्ष की याद दिलाने के साथ-साथ भारत-अफ्रीका व्यापार और सहयोग को आगे बढ़ाने वाला साबित हुआ. 2020 में ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के आगमन ने ब्रिक्स समूह के भीतर भारत की भूमिका को उजागर किया. रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी पर विशेष जोर दिया गया, हालांकि इसके तुरंत बाद कोरोना महामारी ने वैश्विक गतिविधियों को रोक दिया.

2021–2022: कोरोना काल में परंपरा पर विराम
कोविड-19 महामारी के कारण 2021 और 2022 में किसी भी विदेशी नेता को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित नहीं किया गया. इन वर्षों में स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए परेड को सीमित स्वरूप में आयोजित किया गया, जो एक असाधारण वैश्विक स्थिति को दर्शाता है.

2023–2024: महामारी के बाद कूटनीति की नई शुरुआत
2023 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी की उपस्थिति के साथ गणतंत्र दिवस समारोह में विदेशी मुख्य अतिथि की वापसी हुई. यह पहला मौका था जब किसी मिस्र के राष्ट्रपति को यह सम्मान मिला. मिस्र की सैन्य टुकड़ी का भारतीय जवानों के साथ मार्च करना भारत-अफ्रीका संबंधों का प्रतीक बना. 2024 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दोबारा आमंत्रण ने रक्षा और तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया, जिसमें पनडुब्बी और दीर्घकालिक रणनीतिक समझौते प्रमुख रहे.

2025–2026: एशिया और यूरोप के साथ भविष्य की साझेदारी
2025 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो मुख्य अतिथि बने, जिससे आसियान देशों के साथ भारत की निरंतर साझेदारी को बल मिला. वहीं 2026 में यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि होंगे. यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के नेतृत्व को सामूहिक रूप से यह सम्मान दिया जा रहा है. इस आमंत्रण का उद्देश्य भारत और यूरोप के बीच मुक्त व्यापार समझौते, तकनीकी सहयोग और वैश्विक आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देना है.

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