विपक्षी दलों ने ओम बिरला के खिलाफ पेश किया अविश्वास प्रस्ताव, पद से हटाने की मांग की

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश कर उन्हें पद से हटाने की मांग की. प्रस्ताव पर करीब 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

नई दिल्लीः कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. पार्टी की ओर से यह नोटिस लोकसभा के महासचिव को सौंपा गया है. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने जानकारी दी कि यह नोटिस दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर लोकसभा की कार्यवाही प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 94(सी) के तहत प्रस्तुत किया गया.

प्रस्ताव पर करीब 119 सांसदों के हस्ताक्षर

उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव पर करीब 119 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, जो विपक्ष के व्यापक समर्थन को दर्शाते हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह कदम मौजूदा सत्र के दौरान सामने आई कई गंभीर चिंताओं के चलते उठाया गया है. विपक्ष का आरोप है कि सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है. उनका कहना है कि विपक्षी सांसदों को बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा, महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से रोका जा रहा है और व्यवधानों के मामलों में एकतरफा कार्रवाई की जा रही है. 

कांग्रेस का दावा है कि इन परिस्थितियों में लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है. इसी वजह से अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया. पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि 119 सांसदों के हस्ताक्षर इस बात का संकेत हैं कि केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य विपक्षी दल भी सदन की कार्यवाही को लेकर असंतोष महसूस कर रहे हैं. उनके मुताबिक, यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र की मर्यादाओं और निष्पक्ष संचालन के लिए उठाया गया कदम है.

इस पूरे घटनाक्रम से पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा था. यह पत्र 4 फरवरी 2026 को सदन में हुए हंगामे के संदर्भ में भेजा गया था. पत्र में महिला सांसदों ने विपक्षी सदस्यों पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की थी.

भाजपा सांसदों का आरोप 

भाजपा सांसदों के पत्र में आरोप लगाया गया कि विपक्षी सांसद सदन के वेल में घुस आए, अध्यक्ष की मेज तक पहुंचने की कोशिश की और कार्यवाही को बाधित किया. उनका कहना था कि इस तरह के आचरण से संसद की गरिमा को ठेस पहुंचती है और ऐसे मामलों में सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जाने चाहिए.

एक तरफ कांग्रेस और विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर भाजपा विपक्ष पर संसदीय मर्यादाओं के उल्लंघन का आरोप लगा रही है. इन दोनों घटनाओं के चलते संसद का सियासी माहौल और अधिक गरमा गया है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है.

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