महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में महायुति की बड़ी जीत, 12 जिलों में कायम किया दबदबा

महाराष्ट्र जिला परिषद चुनावों में महायुति गठबंधन ने 12 जिलों में स्पष्ट बहुमत हासिल किया. भाजपा, शिंदे शिवसेना और अजित पवार गुट ने विपक्ष को पीछे छोड़ दिया.

Shraddha Mishra

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर जनता का मूड साफ कर दिया है. हाल ही में हुए जिला परिषद चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने ऐसा जोरदार प्रदर्शन किया कि विपक्ष के लिए यह परिणाम किसी बड़े झटके से कम नहीं रहे. 12 जिलों में हुए इन चुनावों में महायुति ने न सिर्फ बढ़त बनाई, बल्कि स्पष्ट बहुमत हासिल कर अपनी पकड़ मजबूत साबित की.

कुल 731 जिला परिषद सीटों में से महायुति गठबंधन ने 562 सीटों पर जीत दर्ज की. गठबंधन में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने अकेले 233 सीटें अपने नाम कीं. इसके बाद अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को 167 सीटें मिलीं, जबकि एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने 162 सीटों पर जीत हासिल की. इन आंकड़ों ने साफ कर दिया कि ग्रामीण इलाकों में भी महायुति को जनता का व्यापक समर्थन मिला है.

विपक्ष को करारी हार

विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) इन चुनावों में काफी पीछे नजर आई. कांग्रेस को जहां 56 सीटों से संतोष करना पड़ा, वहीं उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 43 सीटें मिलीं. शरद पवार की एनसीपी केवल 26 सीटें ही जीत सकी. ये नतीजे बताते हैं कि एमवीए के लिए जमीनी स्तर पर समर्थन जुटाना आसान नहीं रहा. वहीं, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने लातूर और रत्नागिरी में एक-एक सीट जीतकर कुल दो सीटें हासिल कीं. वहीं निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने मिलकर 42 सीटों पर जीत दर्ज की.

मतदान और क्षेत्रीय विवरण

इन स्थानीय निकाय चुनावों के लिए 7 फरवरी को मतदान हुआ था, जिसमें 67 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. चुनाव कोंकण, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन के 12 जिलों में कराए गए थे. इनमें रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सतारा, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर शामिल हैं. जिला परिषद के साथ-साथ पंचायत समिति की 1,462 सीटों की मतगणना भी पूरी की गई.

जिलावार तस्वीर

जिलावार नतीजों पर नजर डालें तो रायगढ़ और रत्नागिरी जैसे कोंकण क्षेत्र में शिंदे गुट की शिवसेना का प्रदर्शन मजबूत रहा. पुणे में अजित पवार गुट की एनसीपी ने बड़ी जीत दर्ज की, जबकि सोलापुर और सिंधुदुर्ग में भाजपा का दबदबा देखने को मिला. लातूर में कांग्रेस सबसे आगे रही, लेकिन वहां भी भाजपा और एनसीपी (अजित पवार) ने कड़ी टक्कर दी.

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