'घुसपैठियों को नौकरी न दें, पहचान कर अधिकारियों को बताएं', अवैध प्रवास पर आरएसएस चीफ का बड़ा बयान

आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है. उन्होंने न सिर्फ घुसपैठियों की पहचान में मदद करने को कहा, बल्कि उन्हें रोजगार न देकर आर्थिक रूप से अलग-थलग करने का भी आह्वान किया.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवतने घुसपैठ के मुद्दे पर नागरिकों से सतर्क भूमिका निभाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) जैसी प्रक्रियाएं घुसपैठियों की पहचान में सहायक बन रही हैं, लेकिन समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है.

आरएसएस की शताब्दी के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में विशाल सभा को संबोधित करते हुए भागवतने कहा कि लोगों को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए, उनकी पहचान कर संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए और उन्हें रोजगार न देकर आर्थिक रूप से अलग-थलग करना चाहिए.

घुसपैठियों की पहचान में नागरिकों की भूमिका

भागवतने कहा, "बाहर से आने वालों की पहचान उनकी भाषा से की जा सकती है. हमें उनका पता लगाकर संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए. वे जांच करेंगे और उन पर नजर रखेंगे." उन्होंने जोर देकर कहा कि सतर्क नागरिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं.

मोदी सरकार में कार्रवाई तेज

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि पिछली सरकारों ने घुसपैठ के मसले पर ठोस कदम नहीं उठाए, जबकि मौजूदा सरकार ने इस दिशा में सक्रिय कार्रवाई शुरू की है. उनके अनुसार, “जनगणना की जा रही है, जिसके बाद एसआईआर (SIR) की जाएगी. जो लोग भारतीय नहीं हैं, उनकी पहचान शुरू हो चुकी है. इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें स्वतः ही हटा दिया जाएगा.”

रोजगार और आर्थिक बहिष्कार की अपील

भागवतने कहा कि कई स्थानों पर घुसपैठिए छोटे-मोटे कामों में लगे हुए हैं, क्योंकि स्थानीय लोगों ने बेहतर वेतन वाली नौकरियों की तलाश में ये कार्य छोड़ दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा, “हम किसी भी विदेशी को नौकरी नहीं देंगे. हमारे देश का कोई भी व्यक्ति, चाहे वह मुसलमान ही क्यों न हो, उसे नौकरी मिलेगी, लेकिन किसी विदेशी को नहीं.”

भाजपा और संघ के संबंधों पर बयान

आरएसएस प्रमुख ने उन दावों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि संघ को भाजपा से लाभ मिलता है. उन्होंने कहा, “संघ को भाजपा से प्रत्यक्ष रूप से कोई लाभ नहीं हुआ है; बल्कि, संघ के विचारों और नीतियों से जुड़े दलों को समाज में संघ की बढ़ती ताकत और स्वीकार्यता से लाभ हुआ है.”

नेतृत्व और जाति पर स्पष्ट रुख

सरसंघचालकों के ब्राह्मण होने से जुड़े सवाल पर भागवतने कहा, "ब्राह्मण होना इस पद के लिए कोई योग्यता नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित होना अयोग्यता नहीं है." उन्होंने बताया कि संघ में सभी जातियों और समुदायों का प्रतिनिधित्व है.

काम से सेवानिवृत्ति नहीं

अपने कार्यकाल को लेकर भागवतने कहा, "जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने को कहेगा, मैं ऐसा कर दूंगा. लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी."

कार्यक्रम में उद्योग जगत और फिल्मी दुनिया की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं. भागवतने कुल 143 सवालों के जवाब दिए, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीति, संस्कृति, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण जैसे विषय शामिल थे.

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