बीएमसी मेयर चुनाव: रितु तावड़े मेयर उम्मीदवार, डिप्टी मेयर के लिए संजय घाड़ी फाइनल
मुंबई को करीब चार साल बाद निर्वाचित मेयर मिलने जा रहा है. बीएमसी मेयर चुनाव के लिए भाजपा ने रितु तावड़े को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि उप महापौर पद के लिए एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने संजय घाड़ी के नाम पर मुहर लगाई है। 11 फरवरी को होने वाले चुनाव पर अब सभी की नजरें टिकी हैं.

मुंबई: मुंबई में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मेयर पद को लेकर चल रहा इंतजार अब खत्म होने वाला है. भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को रितु तावड़े को बीएमसी मेयर पद के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है. वहीं, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उप महापौर पद के लिए संजय घाड़ी के नाम पर मुहर लगा दी है.
इस घोषणा के साथ ही मुंबई को करीब चार साल बाद एक निर्वाचित मेयर मिलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. बीएमसी प्रशासन ने पुष्टि की है कि मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव 11 फरवरी को रात 11:30 बजे के बाद मुंबई स्थित बीएमसी मुख्यालय में कराए जाएंगे.
2022 से बिना निर्वाचित पार्षदों के चल रहा था निगम
पिछली बीएमसी परिषद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से वर्ष 2022 से नगर निगम बिना निर्वाचित पार्षदों के काम कर रहा था. इस दौरान पूरे निगम का प्रशासनिक संचालन नगर आयुक्त के अधीन रहा. अधिकारियों के अनुसार, आगामी मेयर चुनाव की पूरी प्रक्रिया बीएमसी आयुक्त भूषण गगरानी की निगरानी में संपन्न कराई जाएगी.
रितु तावड़े क्यों मानी जा रही हैं मजबूत उम्मीदवार
भाजपा की वरिष्ठ नेता रितु तावड़े को नगर निगम प्रशासन में अनुभवी और मजबूत दावेदार के रूप में देखा जा रहा है. उन्हें बीएमसी के कामकाज का लंबा अनुभव है और वे कई बार पार्षद रह चुकी हैं.
रितु तावड़े पहली बार वर्ष 2012 में वार्ड नंबर 127 से निर्वाचित हुई थीं. इसके बाद 2017 में उन्होंने घाटकोपर के वार्ड नंबर 121 का प्रतिनिधित्व किया. हाल ही में 2025 के चुनावों में उन्होंने वार्ड नंबर 132 से जीत दर्ज की है.
शिक्षा समिति की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं तावड़े
नगर निगम में अपने राजनीतिक सफर के दौरान रितु तावड़े ने बीएमसी की शिक्षा समिति की अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है. इस वजह से पार्टी के भीतर और गठबंधन में उनके नाम पर सहमति बनना अपेक्षाकृत आसान रहा.
देश के सबसे अमीर नगर निकाय पर टिकी निगाहें
बीएमसी मेयर चुनाव को लेकर सियासी हलकों में खासा उत्साह है, क्योंकि यह चुनाव भारत के सबसे समृद्ध नगर निकाय के राजनीतिक नेतृत्व का फैसला करेगा. लंबे समय तक प्रशासनिक नियंत्रण में रहने के बाद अब निर्वाचित नेतृत्व की वापसी को लेकर सभी की निगाहें 11 फरवरी के चुनाव परिणाम पर टिकी हुई हैं.


