हमारा पड़ोसी जरा सिरफिरा है, कब हथियारों की जरूरत पड़ जाए...नागपुर में रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान और चीन पर साधा निशाना

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमें डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनना चाहिए. उन्होंने बिना चीन और पाकिस्तान के नाम लिए कहा कि हमारा पड़ोसी जरा सिरफिरा है, कब क्या हरकत कर दे कुछ नहीं कहा जा सकता है. न जाने कब हमें हथियारों की जरूरत पड़ जाए.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिना किसी देश का नाम लिए भारत के पड़ोसी पाकिस्तान और चीन पर तीखा हमला बोला है. नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत का एक पड़ोसी “जरा सिरफिरा” है और कब क्या हरकत कर दे, यह कहा नहीं जा सकता. ऐसे हालात में देश को हर समय तैयार रहना होगा, क्योंकि हथियारों की जरूरत कब पड़ जाए, इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता. इसी कारण भारत के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना समय की मांग है.

आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहे PM मोदी 

आपको बता दें कि राजनाथ सिंह नागपुर में इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव कंपनी के दौरे पर पहुंचे थे. यहां उन्होंने रक्षा उत्पादन, भविष्य की युद्ध रणनीतियों और निजी क्षेत्र की भूमिका को लेकर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहे हैं और सरकार उसी दिशा में ठोस कदम उठा रही है.

मैन्युफैक्चरिंग में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका
रक्षा मंत्री ने कहा कि एक समय था जब भारत का पूरा डिफेंस सेक्टर केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित था और निजी कंपनियों की भागीदारी के बारे में कोई सोचता तक नहीं था. लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. उन्होंने कहा कि सरकार को निजी क्षेत्र की क्षमता पर पूरा भरोसा है और आने वाले समय में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में उसकी भूमिका कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए.

उत्पादन और निर्यात में बढ़ोतरी
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने पिछले दस वर्षों में रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों के आंकड़े भी साझा किए. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये का था, जो आज बढ़कर डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. यह बढ़ोतरी निजी क्षेत्र की भागीदारी और सरकार की नीतियों का सीधा परिणाम है.

हथियार निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत को हथियारों के उत्पादन का ग्लोबल हब बनाना है. उन्होंने हाल के सैन्य अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार ऑपरेशन 80 से 90 घंटे तक लगातार चलते हैं, जहां हर मिनट और हर फैसले का महत्व होता है. ऐसे गहन और तीव्र अभियानों के लिए मजबूत तैयारी और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली बेहद जरूरी है.

तेजी से बदल रहा है युद्ध का स्वरूप
रक्षा मंत्री ने मौजूदा वैश्विक हालात का हवाला देते हुए कहा कि आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. कहीं युद्ध वर्षों से चल रहे हैं, कहीं कुछ महीनों तक सीमित रहते हैं और कहीं कुछ घंटों में ही समाप्त हो जाते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे उदाहरणों से यह साफ है कि युद्ध की तीव्रता और तकनीकी जटिलता लगातार बढ़ रही है. ऐसे में भारत को हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना होगा.

स्वदेशी हथियार प्रणालियों पर भरोसा
अपने संबोधन के अंत में राजनाथ सिंह ने स्वदेशी हथियार प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘नागास्त्र’ जैसे हथियारों के और भी आधुनिक संस्करण विकसित किए जा चुके हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर ये हथियार दुश्मनों के लिए बेहद घातक साबित होंगे.उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि भारत का पड़ोसी कब क्या कदम उठा ले, इसका भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए आत्मनिर्भर और मजबूत रक्षा व्यवस्था ही देश की सुरक्षा की गारंटी है.

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