बूंद-बूंद पानी को तरसेगा पाकिस्तान, सिंधु संधि सस्पेंड के बाद वुलर बैराज पर भारत का बड़ा ऐलान

वुलर बैराज जम्मू-कश्मीर में फिर से शुरू होने जा रहा है. सिंधु जल संधि निलंबित होने के बाद झेलम नदी पर बड़ा जलाशय बन सकेगा. इससे बाढ़ पर काबू, बेहतर सिंचाई और हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार के शानदार मौके मिलेंगे. कश्मीर के विकास की नई उम्मीद जाग रही है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था. सरकार ने स्पष्ट किया कि यह समझौता शांति के दौर के लिए था और यदि पाकिस्तान शांति बनाए रखने में असमर्थ है तो संधि की समीक्षा जरूरी है. इसी कड़ी में अब जम्मू-कश्मीर सरकार ने चार दशक से ठप पड़ी वुलर बैराज परियोजना, जिसे तुलबुल नेविगेशन परियोजना के नाम से भी जाना जाता है. जिसे

 दोबारा शुरू करने की ठोस तैयारी की जा रही है. यह परियोजना झेलम नदी के पानी को नियंत्रित करने और भंडारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर इस योजना को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सिंधु जल संधि के प्रावधानों के कारण पहले यह परियोजना रोकी गई थी, जिसमें एशियाई विकास बैंक से फंडिंग भी ली गई थी, लेकिन काम रुक गया. अब संधि निलंबित होने से रुकावटें दूर हो गई हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है.

परियोजना का मुख्य उद्देश्य

तुलबुल परियोजना का लक्ष्य झेलम नदी के प्रवाह को नियंत्रित करना, वुलर झील में पानी का भंडारण बढ़ाना और पूरे साल नौवहन सुनिश्चित करना है. इससे बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में बताया कि राज्य सरकार केंद्र के साथ दो बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है, जिनमें अखनूर में चेनाब नदी से जम्मू शहर को जलापूर्ति और झेलम पर तुलबुल परियोजना शामिल है.

वुलर झील की मौजूदा स्थिति

वुलर झील का आकार झेलम नदी के बहाव पर निर्भर करता है. इसका न्यूनतम क्षेत्रफल करीब 20 वर्ग किलोमीटर और अधिकतम लगभग 190 वर्ग किलोमीटर तक होता है. सर्दियों में कम पानी के कारण झील के कई हिस्से सूख जाते हैं, जिससे पर्यावरण और स्थानीय जीवन प्रभावित होता है.

स्थानीय लोगों की उम्मीदें

बांदीपोरा से सोपोर तक सैकड़ों परिवार मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी निकालने के लिए इस झील पर निर्भर हैं. झील के सिकुड़ने से उनकी आय पर गहरा असर पड़ा है. स्थानीय लोग मानते हैं कि बैराज परियोजना शुरू होने से जल स्तर स्थिर होगा और उनकी पारंपरिक आजीविका को नई जिंदगी मिलेगी.

पाकिस्तान की चिंता और प्रतिक्रिया 

सिंधु जल संधि निलंबन के बाद पाकिस्तान ने कई बार चेतावनी दी है कि पानी रोकना युद्ध जैसा कदम होगा. भारत ने अपने फैसले पर अडिग रहने की बात कही है. अब वुलर बैराज परियोजना के पुनरारंभ से क्षेत्रीय जल प्रबंधन में बदलाव आएगा, जो आने वाले समय में स्थानीय विकास और अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है.

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