Parliament Session: सरकार की तरफ से जबसे संसद के विशेष सत्र को बुलाए जाने की बात कही गई है तभी से विपक्ष के साथ-साथ सभी की तरफ से अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस विशेष सत्र का मकसद क्या हो सकता है? सत्र शुरू होने से एक दिन पहले सर्वदलीय बैठक के बाद विपक्ष की तरफ से कहा गया कि सरकार की बातों से तो ऐसा लग रहा है कि सत्र साधारण ही रहने वाला है.

हालांकि उनकी तरफ से यह आशंका भी जताई गई की सरकार कुछ भी कर सकती है. इसी के साथ ही मुख्य विपक्षी दल यानी कांग्रेस की तरफ से मांग की गई कि महिला आरक्षण बिल को लाया जाए. जिसके बाद आज सरकार की तरफ से भी ऐसे संकेत मिले की इस विशेष सत्र के दौरान सदन में महिला आरक्षण बिल पेश किया जा सकता है. इस खबर में आपको बताएंगे कि इस बिल में ऐसा क्या है जिसके लिए कांग्रेस मांग कर रही है और सत्ता पक्ष भी सहमत नजर आ रहा है?

27 साल पुराना है मुद्दा

बता दें कि अभी तक सरकार की तरफ से महिला आरक्षण बिल के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी सरकार एक बार फिर से चौंकाने वाला फैसला ले सकती है. बता दें कि महिला आरक्षण का मुद्दा करीब 27 साल पुराना है. यूपीए की सरकार के समय कई बार कोशिश की गई कि इसे सदन से पास कराया जा सके लेकिन संभल नहीं हो सका. 

कांग्रेस लेना चाहती है क्रेडिट

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जिस प्रकार से कांग्रेस ने संसद के विशेष सत्र से ठीक पहले अपनी वर्किंग कमेटी में महिला आरक्षण विधेयक लानी की मांग रख दी है उससे कहा जा रहा है कि सरकार पहले ही इस मसले पर पूरी तैयारी कर चुकी है और कांग्रेस को इस बात की भनक पहले से ही लग चुकी है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने ऐसा इसलिए किया ताकि बिल पास होने पर इसका पूरा क्रेडिट सरकार को ही ना मिल जाए. 

सदन में हमेशा कम रहीं महिलाएं

बता दें कि लोकसभा और विधानसभा में अब भले ही महिलाओं की हस्सेदारी पहले की तुलना में ज्यादा दिखने लगी हो लेकिन फिर भी यह पुरूषों की तुलना में काफी कम है. यह अक्सर मुद्दा रहा है कि सदनों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जाए. 

यूपीए सरकार में भी पेश हुआ था बिल

लंबे समय से इस बात की मांग भी होती रही है कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी का आरक्षण दिया जाए लेकिन यह बिल पास नहीं हो सका. बता दें कि यूपीए सकार में भी इस बिल को पेश किया गया था जोकि राज्यसभा में तो पास हो गया था लेकिन लोकसभा में इसे पर्याप्त मत नहीं मिल पाए. 

महिला आरक्षण बिल पर लगे रोड़े

अबतक इस बिल के सदन से पास न हो पाने के पीछे के कारण हैं कुछ क्षेत्रीय दल. समाजवादी पार्टी जैसे कुछ दल चाहते हैं कि महिला आरक्षण में सब-कोटा भी होना चाहिए. इसका मतलब ये है कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के अंदर भी ओबीसी, एससी और एसटी के हिसाब से आरक्षण दिया जाए. यही कारण है कि यह बिल अभी तक पास नहीं हो सका है. 

मोदी सरकार पास करा सकती है बिल 

बताते चलें कि अगर सरकार चाहेगी तो आसानी से इस बिल को दोनों सदनों से पास किया जा सकता है. लोकसभा में किसी भी बिल को पास कराने के लिए भाजपा सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है और राज्यसभा में भी कुछ ही समर्थन के साथ सरकार इसे आसानी से पास करा सकती है.