डेरा, दलित और दिल्ली की सत्ता, क्या मोदी सरकार पंजाब में धर्म के सहारे साध रही राजनीति

77वें गणतंत्र दिवस पर डेरा प्रमुख संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान देने का ऐलान हुआ वहीं अब 1 फरवरी को रविदास जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के जालंधर जिले के पास स्थित डेरा सचखंड बल्लां का दौरा करने वाले हैं. पीएम मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में होने जा रही है, जब अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 फरवरी को संत गुरु रविदास जयंती के अवसर पर पंजाब के जालंधर जिले के समीप स्थित डेरा सचखंड बल्लां जाने वाले हैं. यह दौरा ऐसे समय तय हुआ है, जब पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. इसी बीच डेरा प्रमुख संत निरंजन दास को 77वें गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री सम्मान दिए जाने की घोषणा ने इस यात्रा को सामाजिक और राजनीतिक दोनों लिहाज से खास बना दिया है.

डेरा प्रमुख के आग्रह से तय हुई यात्रा

दरअसल, बीते दिसंबर में डेरा प्रमुख संत निरंजन दास ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने रविदास जयंती समारोह में शामिल होने और आगामी वर्ष गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का आग्रह किया था. केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के मुताबिक, प्रधानमंत्री बजट सत्र में भाग लेने के बाद उसी दिन दोपहर में डेरा बल्लां पहुंचेंगे. उन्होंने इसे पंजाब के सभी समुदायों के लिए सम्मान और गौरव का अवसर बताया है.

दोआबा क्षेत्र और डेरा बल्लां का प्रभाव
डेरा सचखंड बल्लां पंजाब के दोआबा क्षेत्र में स्थित है, जो रविदासिया समुदाय का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है. पंजाब में दलित आबादी लगभग 32 प्रतिशत है, जो देश में सबसे अधिक है, और इनमें से करीब आधे से ज्यादा दलित दोआबा क्षेत्र में रहते हैं. राजनीतिक दृष्टि से भी यह इलाका बेहद अहम है, क्योंकि यहां से विधानसभा की 117 में से 23 सीटें आती हैं. माना जाता है कि डेरा बल्लां का प्रभाव इनमें से बड़ी संख्या में सीटों पर पड़ता है, जिससे इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है.

चुनावी राजनीति में डेरों की भूमिका
पिछले विधानसभा चुनावों में डेरा बल्लां के असर को साफ तौर पर देखा गया है. 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी की लहर के बावजूद कांग्रेस ने दोआबा में अच्छी स्थिति बनाए रखी थी. वहीं 2017 में कांग्रेस ने इस क्षेत्र में लगभग पूरी तरह जीत दर्ज की थी. यही वजह है कि लगभग हर राजनीतिक दल के बड़े नेता, चाहे वह आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भाजपा या अकाली दल से हों, समय-समय पर डेरा प्रमुख से संपर्क और मुलाकात करते रहे हैं.

चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति 
पंजाब भाजपा नेतृत्व का कहना है कि संत निरंजन दास ने गुरु रविदास महाराज के विचारों को देश और विदेश तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया है. भाजपा के अनुसार, उन्हें पद्मश्री सम्मान देने का निर्णय इसी योगदान को मान्यता देने के लिए लिया गया है. पार्टी इसे केंद्र सरकार की उस सोच से जोड़कर देख रही है, जिसमें हर वर्ग, समुदाय और क्षेत्र के योगदान को सम्मान देने की बात कही जाती है.

2009 के बाद बदली डेरा की पहचान
डेरा सचखंड बल्लां वर्ष 2009 में उस समय चर्चा में आया था, जब ऑस्ट्रिया के वियना में संत रामानंद की हत्या कर दी गई थी. इस घटना से पंजाब में दलित और सिख समुदाय के बीच तनाव पैदा हुआ था, जिसमें संत निरंजन दास भी घायल हुए थे. इसके बाद 2010 में उन्होंने रविदासिया धर्म की औपचारिक घोषणा की और ‘अमृत बाणी: सतगुरु रविदास ग्रंथ’ को पवित्र ग्रंथ के रूप में अपनाया. यह फैसला समुदाय के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ, हालांकि इससे डेरा के भीतर मतभेद भी सामने आए.

धर्म, समाज और राजनीति का संगम
विशेषज्ञ मानते हैं कि डेरा सचखंड बल्लां अब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रह गया है, बल्कि यह दलित समाज की पहचान, सामाजिक सशक्तिकरण और राजनीतिक प्रभाव का बड़ा केंद्र बन चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित यात्रा इस बात का संकेत मानी जा रही है कि आने वाले समय में पंजाब की राजनीति में डेरा बल्लां की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है.

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