प्रियंका ने SIR बोलकर प्रधानमंत्री को ललकारा, कहा- ''यदि आवाज रोकी गई तो असली ड्रामा सत्ता का होगा, विपक्ष का नहीं''

संसद के शीतकालीन सत्र से पहले पीएम मोदी ने विपक्ष को ड्रामा कहा। प्रियंका गांधी ने SIR कहकर पलटवार किया. विपक्ष बोला, सवाल उठाना ड्रामा नहीं, रोकना असली ड्रामा.

Sonee Srivastav

New Delhi: संसद का सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सदन में ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए। इस बयान के बाद विपक्ष में तीखी प्रतिक्रिया आई। प्रियंका गांधी ने SIR कहकर जवाब दिया और कहा कि मुद्दों पर चर्चा करना ड्रामा नहीं लोकतंत्र है। उन्होंने कहा कि जनता चुनाव, प्रदूषण और SIR जैसी गंभीर स्थितियों पर जवाब चाहती है। विपक्ष का दावा है कि सरकार सवालों से बच रही है न कि उन पर बहस कर रही है। इस बयान ने सत्र शुरू होने से पहले ही माहौल गर्म कर दिया है।

क्यों आया प्रियंका का SIR

प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री जब संसद में चर्चा के समय नहीं आते तो बाहर से बयान देना उचित नहीं। उनका कहना था कि SIR कहकर उन्होंने सिर्फ सम्मान नहीं बल्कि जवाबदेही की मांग की। उन्होंने तंज किया कि सवाल पूछना ड्रामा है या जवाब से बचना। सोशल मीडिया पर यह बयान तेजी से चर्चा में है। विपक्ष के नेता इसे जनता की आवाज़ बताते हैं। उनका कहना है कि संसद में सवाल उठाना अधिकार है न कि अभिनय जैसा।

क्या सरकार सुनने को तैयार

प्रधानमंत्री ने अपील की कि विपक्ष पराजय की बौखलाहट छोड़कर सकारात्मक भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि यह सत्र औपचारिकता नहीं बल्कि राष्ट्र को तेजी से आगे ले जाने का अवसर है। मोदी ने उम्मीद जताई कि विपक्ष भी मजबूत मुद्दे उठाएगा। विपक्ष ने जवाब दिया कि मुद्दे उठाना चाहते हैं पर उन्हें रोका जाता है। उनका कहना है कि जब बोलने का मौका नहीं मिलता तो पूछना ड्रामा नहीं मजबूरी बन जाता है।

क्या संसद में होगा टकराव

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री चर्चा में शामिल नहीं होते और संवाद से बचते हैं। उनका कहना है कि विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता और फैसला पहले ही तय कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि सदन नहीं चलने की जिम्मेदारी सरकार पर है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनता की आवाज़ दबाने का प्रयास कर रही है। इसीलिए इस बार विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि सवाल उठेंगे चाहे उन्हें ड्रामा कहा जाए या नहीं।

क्या जनता की आवाज़ दबेगी

विपक्ष का कहना है कि देश बेरोजगारी, महंगाई, प्रदूषण और चुनाव की स्थिति पर गंभीर चर्चा चाहता है। प्रियंका ने कहा कि असली ड्रामा सवालों को रोकने में है, न कि उन्हें उठाने में। उनका दावा है कि जब चर्चा रुकती है तो जनता का हक मारा जाता है। संसद उन्हीं सवालों के लिए है जिन्हें सरकार टाल रही है। विपक्ष इसे लोकतंत्र की परीक्षा बता रहा है।

क्या सत्र दे पाएगा समाधान

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र डिलीवर कर सकता है और भारत अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बिहार चुनाव की उच्च भागीदारी को लोकतंत्र की ताकत बताया। विपक्ष ने तंज दिया कि भागीदारी महत्वपूर्ण है पर जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी। वे कहते हैं कि यदि आवाज़ रोकी गई तो संसद सिर्फ भवन रह जाएगी, मंच नहीं। यह सत्र तय करेगा कि सवालों की ताकत बड़ी है या सत्ता का आदेश।

आगे क्या हो सकता है

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सत्र टकराव वाला रहेगा पर उम्मीद है कि चर्चा से समाधान भी निकल सकता है। विपक्ष चाहता है कि वास्तविक मुद्दों पर खुलकर बहस हो। सरकार चाहती है कि कामकाज बाधित न हो। अब नजर इस बात पर है कि संसद सुनेगी या सिर्फ बयान सुने जाएंगे। यदि आवाज़ को जगह मिली तो लोकतंत्र मजबूत होगा। अन्यथा, जैसा विपक्ष कह रहा है, असली ड्रामा यहीं से शुरू होगा।

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