पंजाब में ग्रीनफील्ड स्टील निवेश से उद्योग, रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार मिली

पंजाब में विशेष स्टील उद्योग को बड़ा सहारा मिला है। लुधियाना में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट से निवेश, रोजगार और औद्योगिक भरोसे को नई ताकत मिलने वाली है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

पंजाब सरकार के लिए यह निवेश केवल एक परियोजना नहीं है बल्कि एक संकेत है कि राज्य दोबारा उद्योगों के भरोसे में लौट रहा है। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि विशेष स्टील निर्माण में ₹1,003.57 करोड़ का ग्रीनफील्ड निवेश प्रस्तावित है। यह निवेश लुधियाना जिले के जसपाल्लों गांव में लगाया जाएगा। लंबे समय से पंजाब उद्योगों के पलायन की चर्चा होती रही है। ऐसे माहौल में यह परियोजना सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। निवेश का मतलब है भरोसा। भरोसे का मतलब है भविष्य। यही संदेश यह परियोजना देती है।

इस परियोजना के पीछे कौन सी कंपनी है?

इस निवेश का प्रस्ताव AISRM मल्टीमेटल्स प्राइवेट लिमिटेड ने दिया है। यह कंपनी अरोड़ा आयरन ग्रुप का हिस्सा है। समूह का कुल टर्नओवर करीब ₹2,200 करोड़ बताया गया है। कंपनी का अनुभव स्टील और धातु क्षेत्र में मजबूत माना जाता है। इसी वजह से सरकार भी इस प्रस्ताव को गंभीरता से देख रही है। कंपनी आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर उत्पादन की योजना लेकर आई है। यह कोई छोटा प्लांट नहीं होगा। यह एक पूर्ण औद्योगिक इकाई होगी।

लुधियाना को इससे क्या सीधा फायदा होगा?

यह स्टील प्लांट करीब 46 एकड़ जमीन पर लगाया जाएगा। परियोजना से सीधे तौर पर 920 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। लुधियाना पहले से ही औद्योगिक शहर है। यहां साइकिल, होजरी और ऑटो पार्ट्स उद्योग मजबूत हैं। विशेष स्टील की उपलब्धता से स्थानीय उद्योगों की लागत घटेगी। बाहर से माल मंगाने की जरूरत कम होगी। इससे छोटे उद्योगों को भी राहत मिलेगी। रोजगार बढ़ेगा तो स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

कितनी क्षमता और क्या बनेगा यहां?

प्रस्तावित यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता 5.40 लाख मीट्रिक टन होगी। यहां राउंड बार, वायर रॉड, कॉइल और फ्लैट्स बनाए जाएंगे। कच्चे माल के तौर पर स्क्रैप और फेरो अलॉय का इस्तेमाल होगा। प्लांट साल में लगभग 350 दिन चलेगा। यह यूनिट तीन शिफ्ट में काम करेगी। इसका मतलब है लगातार उत्पादन। लगातार उत्पादन का मतलब है स्थिर रोजगार। यही किसी भी औद्योगिक परियोजना की असली ताकत होती है।

कौन सी तकनीक इस प्लांट को खास बनाती है?

इस स्टील प्लांट में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा। इसमें इंडक्शन फर्नेस, इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस और लैडल रिफाइनिंग फर्नेस शामिल हैं। इसके अलावा वैक्यूम डीगैसिंग और एओडी तकनीक भी लगाई जाएगी। कंटीन्यूअस कास्टिंग मशीन और रोलिंग मिल भी होंगी। इन तकनीकों से उच्च गुणवत्ता का अलॉय और विशेष स्टील बनेगा। ऐसा स्टील ऑटोमोबाइल जैसे संवेदनशील उद्योगों के लिए जरूरी होता है। गुणवत्ता ही बाजार में पहचान बनाती है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर को कितना फायदा मिलेगा?

मंत्री संजीव अरोड़ा के मुताबिक ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स सेक्टर में हाई ग्रेड स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। पंजाब के कई उद्योग इस सेक्टर से जुड़े हैं। यह प्लांट उनकी जरूरत को स्थानीय स्तर पर पूरा करेगा। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी। समय और लागत दोनों बचेंगे। उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। यही किसी भी राज्य के औद्योगिक विकास का आधार होता है। लुधियाना को इससे उत्तर भारत के मेटल हब के रूप में और मजबूती मिलेगी।

सरकार इसे भविष्य की दिशा क्यों मानती है?

पंजाब सरकार इस परियोजना को दीर्घकालीन निवेश के रूप में देख रही है। यह केवल उत्पादन नहीं बल्कि वैल्यू एडिशन और टिकाऊ मैन्युफैक्चरिंग का उदाहरण है। सरकार का मानना है कि कुशल श्रम, मजबूत लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक परंपरा पंजाब की ताकत हैं। मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री भगवंत मान के मार्गदर्शन में पंजाब निवेश का बड़ा केंद्र बनेगा। यह परियोजना उसी दिशा में उठाया गया ठोस कदम मानी जा रही है।

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