धोखा और आरोपों का तूफान! AAP ने कांग्रेस पर लगाया BJP से साठगांठ का इल्जाम, क्या टूट जाएगा गठबंधन?
चंडीगढ़ में आम आदमी पपार्टी और कांग्रेस का गठबंधन अब टूटने के कगार पर पहुंच गया है. इस साल होने वाले निगम चुनावों में दोनों अलग-अलग लड़ने की तैयारी में है, जबकि 2024 मेयर चुनाव में दोनों ने मिलकर बीजेपी को हराया था.

चंडीगढ़: चंडीगढ़ में राजनीतिक माहौल गरमा रहा है. आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच पुराना गठबंधन अब टूटने की कगार पर पहुंच गया है. 2024 के मेयर चुनाव में दोनों ने मिलकर भाजपा को हराया था, लेकिन अब दिसंबर 2026 के नगर निगम चुनावों में अलग-अलग लड़ने की तैयारी हो रही है.
नेताओं के तीखे बयान और आरोप-प्रत्यारोप से साफ है कि आने वाले मेयर चुनावों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. कांग्रेस जहां भाजपा को रोकने के लिए किसी से भी हाथ मिलाने को तैयार है, वहीं AAP अलग रास्ता चुन रही है.
नेताओं के बीच बयानबाजी तेज
मंगलवार को AAP के चंडीगढ़ प्रभारी जरनैल सिंह ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला किया. उन्होंने भाजपा के मेयर और कांग्रेस के डिप्टी मेयर पदों पर काबिज होने को दोनों दलों का छिपा गठबंधन बताया. जरनैल ने कहा कि देश अब इस नाटक को समझ चुका है. इसके जवाब में कांग्रेस के स्थानीय अध्यक्ष एचएस लकी ने पलटवार किया.
उन्होंने AAP पर आरोप लगाया कि उसके पार्षद ही बार-बार भाजपा में शामिल होकर धोखा देते हैं. लकी ने साफ कहा कि नगर निगम चुनाव में AAP से कोई गठबंधन नहीं होगा और कांग्रेस अकेले जीत हासिल करेगी. AAP के अध्यक्ष विजय पाल सिंह ने भी दिसंबर चुनावों में अकेले लड़ने का संकेत दिया.
पंजाब चुनावों का सीधा असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह झगड़ा पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है. चंडीगढ़ के नतीजे पंजाब पर प्रभाव डालते हैं. जरनैल सिंह का बयान कांग्रेस को कमजोर दिखाने की रणनीति हो सकती है.
वहीं, कांग्रेस की बैठक में सांसद मनीष तिवारी और अन्य नेताओं ने भाजपा को हराने के लिए लचीला रुख अपनाने पर जोर दिया. लेकिन AAP से दूरी बनाना अब तय लगता है.
AAP की घटती ताकत
AAP की स्थिति कमजोर हो रही है. 2021 के नगर निगम चुनाव में पार्टी ने 14 सीटें जीतीं, लेकिन अब संख्या घटकर 11 रह गई है. कुछ पार्षद कांग्रेस या भाजपा में चले गए, जैसे तरुणा मेहता और हाल ही में पूनम व सुमन शर्मा. 2014 में गुल पनाग के साथ AAP का मजबूत डेब्यू हुआ था, लेकिन अब चुनौतियां बढ़ गई है.
मेयर चुनावों में भी AAP सिर्फ 2024 में ही सफल हुई, जब सुप्रीम कोर्ट ने उसके उम्मीदवार को विजेता घोषित किया. 2025 में भाजपा ने गठबंधन को हराकर जीत हासिल की.


