PoK में जन्मे व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट से राहत, डिपोर्टेशन पर लगाई रोक

पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में जन्मे और बेंगलुरु में रहने वाले एक व्यक्ति अहमद तारिक बट और उनके परिवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उनके पाकिस्तान डिपोर्टेशन पर फिलहाल रोक लगा दी है.

Deeksha Parmar
Edited By: Deeksha Parmar

नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच कूटनीतिक तनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जन्मे एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. बेंगलुरु में रहने वाले अहमद तारिक बट और उनके परिवार के छह सदस्यों की डिपोर्टेशन प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. याचिकाकर्ता का दावा है कि उनके परिवार के पास भारत के वैध पासपोर्ट और आधार कार्ड हैं, फिर भी उन्हें जबरन पाकिस्तान भेजा जा रहा है.

यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं. इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकतर पर्यटक शामिल थे. इसके बाद केंद्र सरकार ने 25 अप्रैल को एक आदेश जारी करते हुए अधिकांश पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए सख्त निर्देश

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा है कि जब तक याचिकाकर्ता के दस्तावेजों की वैधता की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनके खिलाफ कोई भी जोर-जबरदस्ती या डिपोर्टेशन की कार्रवाई न की जाए. कोर्ट ने मानवीय आधार पर याचिकाकर्ता को राहत देते हुए यह भी कहा कि अगर दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया से याचिकाकर्ता असंतुष्ट होते हैं, तो वे जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं.

फैमिली के पास हैं भारतीय दस्तावेज

याचिका में अहमद तारिक बट और उनके परिवार ने दावा किया कि उनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड हैं. इसके बावजूद उन्हें डिटेन कर वाघा बॉर्डर ले जाया गया और पाकिस्तान डिपोर्ट करने की कोशिश की गई. यह मामला सामने आने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर रोक लगा दी है और दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए हैं.

नागरिकों के वीजा रद्द करने का आदेश

केंद्र सरकार ने 25 अप्रैल को एक आदेश जारी कर पाकिस्तानी नागरिकों के सभी वैध वीजा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए थे. इस आदेश में कहा गया था कि भारत सरकार द्वारा जारी सभी वैध वीजा 27 अप्रैल 2025 से अमान्य होंगे. केवल मेडिकल वीजा 29 अप्रैल 2025 तक वैध रहेगा. सभी पाकिस्तानी नागरिकों को संशोधित समयसीमा के अनुसार भारत छोड़ना अनिवार्य होगा.”

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

“यह एक संवेदनशील और मानवीय मामला है. जब तक दस्तावेजों की वैधता पर निर्णय नहीं हो जाता, तब तक परिवार के किसी सदस्य को पाकिस्तान नहीं भेजा जाए,” सुप्रीम कोर्ट

बढ़ता तनाव और कानूनी दखल

पहलगाम हमले के बाद से केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से जुड़े मामलों में सख्ती दिखाई है. इस घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने वाला माना जा रहा है. कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट है कि नागरिकता जैसे गंभीर मामलों में बिना जांच किसी को निर्वासित नहीं किया जा सकता.

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