1950 बनाम 2026: सादगी से शक्ति तक, 76 साल में गणतंत्र दिवस की परेड ने यूं बयां की भारत की कहानी

1950 से 2026 तक गणतंत्र दिवस की परेड भारत के सामाजिक, सैन्य और तकनीकी विकास की कहानी कहती है. सादगी से शुरू हुआ यह सफर आज आत्मनिर्भर, डिजिटल और वैश्विक शक्ति बने भारत का प्रतीक बन चुका है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस भारत के लिए सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक और सामाजिक विकास की अनगिनत कहानियों का प्रतीक है. यह दिन हमें एकजुट करता है, गर्व से भरता है और यह दिखाता है कि हम कितनी दूर आ चुके हैं. 26 जनवरी 1950 से लेकर 2026 तक की यात्रा में हम न केवल राजनीतिक रूप से, बल्कि सैन्य, तकनीकी, सांस्कृतिक और वैश्विक स्तर पर भी एक सशक्त राष्ट्र के रूप में खड़े हैं. हर साल गणतंत्र दिवस की परेड में नए आयाम जुड़ते जा रहे हैं, लेकिन एक चीज हमेशा अपरिवर्तित रही है- हमारे देशवासियों का जज्बा, उत्साह और पर्व के प्रति श्रद्धा.

26 जनवरी 1950 को जब भारत पहली बार गणतंत्र बना, तो यह दिन हमारे देश के लिए न केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का प्रतीक था, बल्कि एक नई पहचान और संविधान के द्वारा आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में उठाया गया कदम भी था. आज 2026 तक, भारत सिर्फ एक सशक्त राजनीतिक सत्ता नहीं, बल्कि सैन्य, तकनीकी, सांस्कृतिक और वैश्विक ताकत के रूप में खड़ा है. 76 वर्षों में गणतंत्र दिवस और उसकी परेड में बदलाव दरअसल भारत के सामाजिक, आर्थिक और सामरिक विकास की कहानी बयान करते हैं.

1950: स्वतंत्रता के बाद का पहला गणतंत्र दिवस

भारत का पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950, भारत के लिए आत्मनिर्भरता और अपनी पहचान की ओर पहला कदम था. उस समय देश विभाजन के दर्द से गुजर रहा था, शरणार्थियों की समस्या थी और संसाधन सीमित थे. देश की आबादी आधी से भी कम थी और अधिकतर लोग गांवों में रहते थे. इरविन स्टेडियम (अब मेजर ध्यान चंद नेशनल स्टेडियम) में पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजित किया गया था. डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और इस अवसर पर देश की सीमित सैन्य शक्ति और संस्कृति का भव्य प्रदर्शन किया गया.

1950 की परेड: सादगी और सैन्य गरिमा

1950 की गणतंत्र दिवस परेड में कोई भव्य मंच या व्यापक झांकियां नहीं थीं. यह परेड मुख्य रूप से भारतीय थल सेना, नौसेना, वायुसेना और पुलिस बल की टुकड़ियों तक सीमित थी. उस वक्त ना तो आज की तरह विशाल LED स्क्रीन थीं, और न ही ड्रोन कैमरे से की जा रही लाइव प्रसारण की सुविधा थी. झांकियां थीं, लेकिन वे आज की तरह संगठित और भव्य नहीं थीं. परेड में घोड़े, ऊंट और कुछ सैन्य वाहन भी शामिल थे. भव्य झांकियां नहीं, सेना की वर्दी, अनुशासन और शान ही इस परेड की मुख्य विशेषताएं थीं.

2026: आत्मनिर्भर, डिजिटल और वैश्विक भारत

2026 में भारत पूरी दुनिया में एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में पहचाना जा रहा है. आज का भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति और तेजी से उभरती आर्थिक शक्ति है. डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं ने भारत की वैश्विक छवि को पूरी तरह से बदल दिया है. स्पेस मिशन, स्वदेशी तकनीकी उत्पाद और रक्षा ताकत के मामले में भारत अब अपने पैरों पर खड़ा है. अभी भी देश में बहुत कुछ बदलना बाकी है, लेकिन बदलाव की रफ्तार बनी हुई है. 

2026 की परेड: शक्ति, तकनीक और विविधता का अद्भुत संगम

2026 की गणतंत्र दिवस परेड अब कर्तव्य पथ पर आयोजित की जाती है, जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अंतर्राष्ट्रीय अतिथि इसका हिस्सा होते हैं. इस वर्ष यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा परेड के मुख्य अतिथि हैं. परेड अब केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत की प्रतीक बन चुकी है. इसमें स्वदेशी मिसाइलें, अत्याधुनिक टैंक, ड्रोन, और अन्य इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां दिखाई जाती हैं, जो भारत की तकनीकी प्रगति और रक्षा ताकत को दर्शाती हैं.

समाज और सोच में बदलाव: एक नया भारत

1950 में देश की साक्षरता दर कम थी, महिलाएं सीमित भूमिका में थीं और ग्रामीण भारत प्रमुख था. आज 2026 में भारत की सोच और समाज में व्यापक बदलाव आया है. डिजिटल साक्षरता में वृद्धि, महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और समाज के हर वर्ग को समावेशी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं. गणतंत्र दिवस की परेड में महिला अग्निवीर, बालिकाओं की एनसीसी टुकड़ियां और दिव्यांगजनों की सहभागिता अब सामान्य दृश्य बन चुकी हैं, जो समावेशी भारत का प्रतीक हैं.

गणतंत्र दिवस का बदलता स्वरूप: एक नई दिशा

गणतंत्र दिवस की परेड ने 1950 से लेकर 2026 तक न केवल सैन्य शक्ति, बल्कि देश की चेतना और आत्मविश्वास का भी प्रदर्शन किया है. 1950 में यह सिर्फ हमारे लिए एक दिन था, जब हमने संविधान को अपनाया और अपने कानून खुद बनाने का अधिकार हासिल किया. 2026 में यह दिन इस बात की गवाही देता है कि भारत न केवल अपने कानून बनाता है, बल्कि पूरी दुनिया को दिशा भी देता है. गणतंत्र दिवस की परेड आज भी संविधान के मूल्यों- न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को जीवंत बनाए हुए है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag