सभी पक्षों की दलील, सरकारों के उपाय...अवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर फैसला सुरक्षित रखा. अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और एक सप्ताह में लिखित जवाब मांगा. पशु कल्याण, जनता सुरक्षा और सड़क सुरक्षा पर संतुलित निर्णय पर जोर दिया गया.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को आवारा कुत्तों से जुड़ी कई याचिकाओं पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया. यह मामला कुत्तों की सुरक्षा, नियंत्रण और लोगों की सुरक्षा से संबंधित है. शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह कदम उठाया है. अदालत ने वकीलों से आदेश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाब दाखिल करें.

सभी हितधारकों की दलीलें सुनी गईं

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारी की पीठ ने की. अदालत ने कुत्ते प्रेमियों, कुत्ते के काटने के शिकार लोगों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और केंद्र एवं राज्य सरकारों की ओर से पेश वकीलों की दलीलों को विस्तार से सुना. विभिन्न राज्यों ने आवारा कुत्तों के नियंत्रण और उनके प्रबंधन के लिए उठाए गए कदमों के बारे में अपनी बातें रखी.

विशेष रूप से पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों द्वारा उठाए गए उपायों पर अदालत ने गौर किया. अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि कुछ राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों पर आवारा कुत्तों को हटाने और उचित बाड़बंदी की व्यवस्था करने के लिए कदम उठाए गए हैं.

बाड़बंदी पर ध्यान

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वकील की दलीलें भी सुनीं, जिन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा कुत्तों को हटाने और सड़कों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए उपायों की जानकारी दी. अदालत ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों से सावधानीपूर्वक विचार करने को कहा.

पशु कल्याण बोर्ड को निर्देश

पीठ ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) को भी निर्देश दिया कि वे पशु आश्रयों या पशु जन्म नियंत्रण सुविधाओं के लिए अनुमति मांगने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई करें. अदालत ने कहा कि AWBI को या तो आवेदनों को स्वीकार करना चाहिए या अस्वीकार करना चाहिए, लेकिन यह प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि आवारा कुत्तों के संरक्षण और नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखा जाए. दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा.

राज्यों से मांगे सुझाव

अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है, लेकिन सभी राज्यों और संबंधित पक्षों से रिपोर्ट और सुझाव एक सप्ताह के भीतर मांगे गए हैं. यह मामला न केवल कुत्तों के अधिकारों से जुड़ा है बल्कि आम जनता की सुरक्षा और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा को भी प्रभावित करता है.

 

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